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चोरी-छिपे चल रहा अवैध खनन का गोरखधंधा

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चोरी-छिपे चल रहा अवैध खनन का गोरखधंधा
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नजीबाबाद। मालन नदी क्षेत्र में मेदूवाला में मिट्टी की ढांग में दबकर मजदूरों की मौत हो या सूकरो नदी में रेल पुल ध्वस्त होने का मामला। अवैध खनन से समय-समय पर जान-माल की बड़ी क्षति होती आई है। क्षेत्र में अभी भी चोरी-छिपे अवैध खनन जारी है।
नजीबाबाद तहसील क्षेत्र से कई बरसाती नदियां गुजरती हैं। राजस्व कर्मियों और वन कर्मियों से साठगांठ कर खनन माफिया इन नदियों में अवैध खनन करने में कामयाब हो जाते हैं। जिसका खामियाजा राष्ट्रीय संपत्ति को क्षति और मजदूरों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ता है। सूकरो नदी में ताबड़तोड़ अवैध खनन से वर्ष 2016 में सूकरो नदी पर बना कोटद्वार ब्रांच लाइन रेल पुल ध्वस्त हो गया था। मामले में कार्रवाई के नाम पर वन विभाग के ढुलमुल रवैये के खिलाफ आरटीआई कार्यकर्ता पुनीत गोयल द्वारा राज्य सूचना आयुक्त को अवगत कराने पर राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने मुख्य वन संरक्षक सुरक्षा, सतर्कता एवं मुख्य सतर्कता अधिकारी लखनऊ को आदेश दिए थे।
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सूकरो नदी में अवैध खनन के चलते 2.26 करोड़ रुपये की आरबीएम निकासी के रूप में राजस्व हानि का मामला जांच में सामने आने पर प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर वन क्षेत्राधिकारी डीके गोयल, वन दरोगा हृदेश सिंह, कोमल सिंह को निलंबित करने के साथ तत्कालीन डीएफओ पीके राघव, सेवानिवृत्त वनाधिकारी हरेंद्र सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई।
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वन विभाग के उच्चाधिकारियों द्वारा की गई कार्रवाई से राज्य सूचना आयुक्त को अवगत कराते हुए आरटीआई कार्यकर्ता पुनीत गोयल ने बताया कि वन संरक्षक मुरादाबाद द्वारा की गई जांच में सूकरो नदी में 3.5 किलोमीटर लंबाई में अवैध खनन कर 1.5 लाख घनमीटर खजिन संपदा के दोहन से शासन को 2.26 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने की पुष्टि हुई। इतना ही नहीं वरिष्ठ अधिकारियों की गैरजिम्मेदारी और अधिनस्थों की खनन माफियाओं से साठगांठ सामने आई। उधर, क्षेत्र में अभी भी चोरी-छिपे अवैध खनन जारी है। नदियों से रोजाना सैकड़ों बुग्गियां रेत निकाला जा रहा है। खनन माफियाओं के लिए काम कर रहे बुग्गी चालक नियत स्थान पर ले जाकर बुग्गी पलटकर रेत एकत्र कर रहे हैं। गुपचुप तरीके से रेत ट्रकों में भरकर तिरपाल से ढककर रेसत-बजरी का खुला कारोबार करने वालों की टाल पर ले जाकर बेचा जा रहा है। और यहां से यह रेत ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
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