शेरकोट (बिजनौर)। आजादी के बाद से कांग्रेस में संपूर्ण जीवन बिताने वाले अफजलगढ़ क्षेत्र से पूर्व विधायक मुंशी महमुदुलहसन अंसारी का बीमारी के चलते मंगलवार को निधन हो गया। उनके निधन से नगर क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
नगर के मोहल्ला काजी सराय निवासी पूर्व विधायक मुंशी महमुदुल हसन अंसारी (85) पुत्र मोहम्मद इब्राहिम का मंगलवार को सुबह लगभग 7:30 बजे बीमारी के चलते निधन हो गया। आजादी के बाद महमुदुल हसन अंसारी को राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली । कांग्रेस हाईकमान ने उन्हें सन 1980 में अफजलगढ़ क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया, लेकिन उस समय मुंशी महमुदुल हसन अंसारी मात्र 185 वोटों से हार गए थे। 1984-85 में दोबारा से अफजलगढ क्षेत्र से प्रत्याशी बनने के बाद वे रिकॉर्ड वोटों से विधायक बने। उस समय प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनी थी। नारायण दत्त तिवारी मुख्यमंत्री थे। नारायण दत्त तिवारी, महमुदुल हसन अंसारी को अफजलगढ़ का शेर कहकर पुकारते थे। मुंशी महमूद मुख्यमंत्री के बेहद करीबी रहे है। बसपा के पूर्व विधायक मो. गाजी ने कांग्रेस के पूर्व विधायक के निधन पर दुख जताया। उनकी अंतिम शव यात्रा में क्षेत्र के राजनैतिक, सामाजिक संस्थाओं के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। एसओ शिशुपाल शर्मा, पूर्व चेयरमैन आसिफ विकार, सुल्तान अहमद अंसारी, शेख नजरुल इस्लाम, पूर्व पालिकाध्यक्ष शेख कमरुल इस्लाम, कांग्रेस नगर अध्यक्ष हाफिज शद्दन, डा. फसीउल्लाह अब्बासी , मुल्ला अरशद , मिर्जा गुड्डू , अज्जू खां, शाहबुद्दीन सभासद, तारिक अंसारी, जावेद अंसारी, रईस महागीर, राकेश रुहेला, अजीत गहलौत सहित बड़ी संख्या में लोगों की आंखें नम थी।
शाम को बाद नमाजे मगरिब उनके शव को कब्रिस्तान मोहल्ला नोंधना में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।