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प्रमोशन चाहने वाले शिक्षकों को झटका

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प्रमोशन चाहने वाले शिक्षकों को झटका
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बिजनौर। परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों के पदों पर शासन ने कैंची चला दी है। इन स्कूलों में पद सृजन में जिले से करीब 2000 प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर दिए हैं। इससे प्रमोशन चाहने वाले शिक्षकों को झटका लगा है। शासन से आई सूची देख कर शिक्षकों में खलबली मची है।
परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के तबादले करने के लिए शासन से दिशा निर्देश आए हैं। इसके लिए शासन ने प्रत्येक स्कूल में छात्र संख्या के आधार पर पद सृजन कर सूची बीएसए को भेजी है। स्कूलों में शिक्षकों के पद सृजन 30 सितंबर 2017 की छात्र संख्या के आधार पर किए गए हैं। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों से 1400 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों से करीब 600 प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त हो जाएंगे। पद सृजन की सूची आ गई है, जिसके आधार पर उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 छात्रों से अधिक संख्या वाले स्कूलों में प्रधानाध्यापक का पद रखा गया है। पद सृजन में राइट टू एजूकेशन का हवाला दिया गया है। जबकि प्राथमिक विद्यालयों में 150 छात्रों की संख्या पर प्रधानाध्यापक का पद रहेगा। इनसे कम छात्र संख्या वाले स्कूलों से प्रधानाध्यापक का पद समाप्त कर दिया गया है। काफी लंबे अर्से से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों के प्रमोशन नहीं हुए हैं। शिक्षकों को उम्मीद थी कि वर्तमान शिक्षा सत्र में शिक्षकों के प्रमोशन होंगे। प्राइमरी स्कूलों के करीब 500 शिक्षकों को भी प्रमोशन का इंतजार था। पर पद सृजन होने से शिक्षकों को झटका लगा है। उधर, बीएसए महेश चंद्र के मुताबिक पद सृजन शासन स्तर पर हुआ है, शासन के निर्देशों का पालन किया जाएगा।
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शिक्षकों ने बताया तुगलकी फरमान
बिजनौर। शिक्षक संगठनों ने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों से प्रधानाध्यापक के पद समाप्त करने के आदेश को तुगलकी फरमान बताया है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री प्रशांत सिंह, ब्लॉक अध्यक्ष अरविंद चौधरी का कहना है कि प्रत्येक स्कूल में प्रधानाध्यापक का पद रहना अनिवार्य होना चाहिए। स्कूल व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक पर रहती है। उप्र जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार यादव व मीडिया प्रभारी अंगजीत सिंह ने भी शासन से आदेश को वापस लेने की मांग की है।
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