बिजनौर। जनपद में एक भी डेंगू का केस नहीं है, जबकि लखनऊ में 29 केस पाए गए हैं। प्रदेश में 102 और पूरे देश में 5613 केस मिले हैं। डेंगू से बचाव के लिए जागरूक होना बेहद जरूरी है। डेंगू फैलाने वाला मच्छर रुके हुए साफ पानी में पनपता है और दिन में ही काटता है। यह बात जिला मलेरिया अधिकारी ब्रजभूषण ने कही।
राष्ट्रीय डेंगू दिवस पर मलेरिया अधिकारी ने कहा कि डेंगू बीमारी एक ऐसा बुखार है जिसे महामारी के रूप में देखा जाता है। बड़ों के मुकाबले बच्चों में यह रोग जल्दी फैलता है। इसलिए इससे बचने के लिए सभी लोगों को जागरूक होना आवश्यक है। ध्यान रखने वाली बात ये है कि डेंगू का मच्छर हमेशा दिन में ही काटता है। यह एक संक्रमण रोग है। एक व्यक्ति को काटने पर यदि वही मच्छर दूसरे व्यक्ति को काट ले तो 100 प्रतिशत चांस डेंगू होने के रहते हैं। क्योंकि यह रोग वायरस से फैलता है।
इससे बचने के लिए पूरी आस्तीन के कपड़े पहने। चार दिन से अधिक बुखार रहने पर तुरंत खून की जांच कराएं, यह सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त की जाती हैं। डीएमओ ब्रजभूषण के अनुसार जनपद बिजनौर में वर्ष 2011 में डेंगू का एक भी केस नहीं था। 2012 में 21 सैंपल लेकर जांच के लिए मेडिकल कॉलेज मेरठ भेजे गए। इनमें से चार पॉजिटिव निकले। 2013-14 में 103 सैंपल में से 22 पॉजिटिव, 2014-15 में शून्य, 2015-16 में 187 सैंपल में से 26 पॉजिटिव, 2017 में 202 में से 22 डेंगू पॉजिटिव केस पाए गए। जबकि 2017-18 में शून्य केस होने का दावा किया है।
डीएमओ ने कहा कि सबसे कम बिजनौर में शून्य और प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 29 केस डेंगू पॉजिटिव पाए गए हैं। इसके अलावा शाहजहांपुर, श्रावस्ती, महाराजगंज, संतकबीरनगर, सिद्धार्थ नगर में एक-एक, गोरखपुर में दो, बरेली, बलरामपुर में, तीन-तीन प्रतापगढ़, उन्नाव में चार-चार, सुल्तानपुर, गोंडा, बस्ती में पांच-पांच, आगरा, सीतापुर, रायबरेली में छह-छह केस मिले हैं।
डेंगू के लक्षण
1. अचानक तेज सिर दर्द और बुखार होना।
2. मांसपेशियां एवं जोड़ों में दर्द होना।
3. आंखों के पीछे दर्द होना, जो कि आंखों को घुमाने से बढ़ता है।
4. जी मिचलाना एवं उल्टी आना, रक्त संचरण का बिगड़ना।
5. नाक, मुंह, मसूड़ों से खून आना अथवा त्वचा पर चकत्ते उभरना।