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...मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले

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...मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले
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नजीबाबाद। ‘मैं जन्म न लेता तो रह जाती विपदाएं कुंवारी, मुझको याद नहीं है मैंने सोकर कोई रात गुजारी... ये वो पंक्तियां हैं जो मानवीय संवेदनाओं से जुड़ीं हैं और इंसान की जिंदगी का खाका खींचती हैं। बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जो पीड़ा, वेदना और कसक को अपनी लेखनी में उतार पाते हैं। साहित्य सृजन से जुड़े मशहूर गीतकार एवं कवि राम अवतार त्यागी ऐसी ही हस्तियों में से एक थे।
मेरी हस्ती को तोल रहे हो तुम, है कौन तराजू जिस पर तोलोगे, मैं दर्द भरे गीतों का गायक हूं, मेरी बोली कितने में बोलोगे..., इस सदन में मैं अकेला ही दीया हूं, मत बुझाओ जब मिलेगी रोशनी मुझसे मिलेगी...। यह पंक्तियां राम अवतार त्यागी की गंभीर और चुनौतीपूर्ण सोच को दर्शाती है। काव्य, गीत और पत्रकारिता के मील के पत्थर रहे रामअवतार त्यागी नजीबाबाद की सरजमीं से बतौर कवि वर्षों तक जुड़े रहे। 25 जुलाई 1925 को संभल में जन्मे छायावादी प्रभाव और सामाजिक विसंगतियों को अपने काव्य व साहित्य सृजन की विधा बनाने वाले रामअवतार त्यागी ने फिल्म इंडस्ट्री में भी अपने सदाबहार गीत के माध्यम से धूम मचाई।
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फिल्म जिंदगी और तूफान के गीत एक हसरत थी कि आंचल का मुझे प्यार मिले, मैंने मंजिल को तलाशा मुझे बाजार मिले... को स्वर सम्राट मुकेश ने आवाज देकर सदाबहार और दिलों की धड़कन बना दिया। समाज की पीड़ा, विसंगतियों को नजदीक से देखने की ललक ने रामअवतार त्यागी को मानवीय संवेदनाओं को समझने और परखने वाला मसीहा बना दिया। नया खून उनका पहला काव्य संग्रह था। सपने महक उठे, गुलाब और बबूल, लहू के चंद कतरे, गीत बोलते हैं, गाता हुआ दर्द जैसे काव्य संग्रह के माध्यम से रामअवतार त्यागी ने साहित्य सृजन की गहरी साख बनाई।
बाल काव्य संग्रह में मैं दिल्ली हूं... काव्य संग्रह न केवल लोकप्रिय हुआ, बल्कि भारत सरकार ने संग्रह को पुरस्कृत भी किया। राष्ट्रप्रेम की भावना उनकी रगों में बसी थी। मन समर्पित, तन समर्पित और यह जीवन समर्पित ... काव्य रचना हिंदी पाठ्यक्रम में शामिल हुई। उनके संग्रह आठवां स्वर को उत्तर प्रदेश सरकार ने पुरस्कृत किया। गागर में सागर भरने वाली काव्यात्मक सोच रखने वाले राम अवतार त्यागी ने समाधान और चरित्रहीन के पत्र उपन्यास से भी अपनी सशक्त लेखनी और दर्द भरी सोच का लोहा मनवाया। 13 अप्रैल 1985 को साहित्य जगत की महान विभूति ने साहित्य जगत और दुनिया को अलविदा कहा। उनकी साहित्यिक सेवाएं आज भी आने वाली पीढ़ियों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
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राष्ट्रप्रेम को समर्पित की लेखनी
नजीबाबाद। साहित्यकार एवं गीतकार राम अवतार त्यागी के गुलाब और बबूल वन, गीत सप्तक-इक्कीस गीत, नया खून, मैं दिल्ली हूं, आठवां स्वर ऐसी रचनाएं हैं जो साहित्यकार के भीतर समायी राष्ट्रप्रेम सोच को दर्शाती है। राम अवतार त्यागी के अनुज नजीबाबाद निवासी साहित्यकार राजेंद्र त्यागी उनकी स्मृति में हर वर्ष साहित्यिक सम्मान समारोह आयोजित करते हैं।
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