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चार महीने में सिर्फ 115 कुष्टरोगी ढूंढ पाए

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अमरोहा। जागरूकता के अभाव में कुष्ठ रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है। जानकारी का अभाव और इलाज कराने में संकोच करने की वजह से लेप्रोसी के मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस बीमारी के लक्षण पाए जाने पर समय रहते इलाज करा लिया जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जाना संभव है। समय पर इलाज न कराने से इसमें शारीरिक विकलांगता की संभावना बनी रहती है।
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जिला कुष्ठ अधिकारी के कार्यालय से लिए गए आंकड़ों के मुताबिक हर दिन औसतन 40 से 50 लोग लेप्रोसी का इलाज कराने आते हैं। जबकि सालभर में 500 से 600 लेप्रोसी के मरीजों को यहां इलाज की सुविधा दी जाती है। इसके अलावा तहसील और ब्लाक स्तर पर भी लेप्रोसी की दवाइयां मरीजों को मुहैया कराई जाती हैं। पिछले साल पहली अप्रेल से इस साल 31 मार्च 2018 तक लेप्रोसी के कुल 316 मरीज थे। मरीजों को छह माह और 12 माह का कोर्स कराकर 105 को रोगमुक्त किया गया। इस साल पहली अप्रेल से 31 जुलाई तक यानी केवल चार माह में लेप्रोसी के 115 नए मरीज खोजे गए हैं। जबकि 175 का पहले से इलाज चल रहा है। इसके अलावा 60 मरीज फॉलोअप के भी हैं। आंकड़े बताते हैं कि लेप्रोसी के मरीजों की संख्या में कमी तो आई है लेकिन जागरूकता के अभाव में बीमारी अपनी जड़ें जमाए हुए है। कई बार लोगों को जानकारी न होने या जानकारी होने के बाद भी इलाज में संकोच करने से भी बीमारी को बढ़ावा मिल रहा है।

कैसे फैलती है लेप्रोसी
अमरोहा। लेप्रोसी दरअसल संक्रामक बीमारी है। लेप्रोसी का बैक्टीरिया रोगी के छींकने और खांसने के दौरान दूसरे लोगों को अपनी चपेट में लेता है। चमड़ी पर सुन्न चकत्ते के रूप में इसके प्रारंभिक लक्षण दिखायी देते हैं। लेप्रोसी असाध्य रोग नहीं है। लक्षण दिखायी देने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। इसके बाद मात्र छह से 12 माह में लेप्रोसी का पूर्ण इलाज संभव है।
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चलाया जा रहा अभियान
अमरोहा। सीएमओ डॉ. रमेशचंद्र शर्मा ने कहा कि लेप्रोसी के मरीजों की खोज के लिए स्वास्थ्य विभाग अभियान चला रहा है। इसके तहत नए मरीजों को चिन्हिंत कर उन्हें इलाज मुहैया कराया जाएगा। जबकि पहले से पीड़ित मरीजों को भी कोर्स कराकर ठीक करने के प्रयास चल रहे हैं। हमने बहुत हद तक लेप्रोसी पर कंट्रोल किया है। जिले में प्रति दस हजार लोगों पर लेप्रोसी की दर घटकर केवल 0.80 फीसदी रह गई है।
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