बिजनौर। जिले में सौ बैड का मल्टीस्पेशिलिटी जिला महिला अस्पताल, कुंदन अस्पताल, संजीवनी अस्पताल, राज अस्पताल आदि में ही वेंटीलेटर और शिशु गहन चिकित्सा इकाई स्पेशल न्यू बोर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) की सुविधा है। वर्ष 2019 जनवरी से लेकर दिसंबर तक इन अस्पतालों में करीब छह हजार बच्चों ने जन्म लिया। जबकि इतनी सुविधा होने के बावजूद 232 बच्चों की मौत हुई।
करीब चार साल पहले 100 बैड का मल्टीस्पेशिलिटी जिला महिला अस्पताल का निर्माण राजकीय निर्माण निगम इकाई द्वारा लगभग 15 करोड़ की लागत से कराया गया था। इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया था। इसमें मदर कंगारू केयर यूनिट की स्थापना की गई थी। लगभग डेढ़ साल पहले इसका शुभारंभ किया गया था। तब से लेकर अब तक नवजात शिशुओं की मृत्यु दर में काफी गिरावट आई है। जिला महिला अस्पताल की सीएमएस आभा वर्मा ने बताया कि पूरे साल उनके यहां पर लगभग 4200 बच्चे पैदा हुए। लगभग 104 बच्चों की पैदा होने के दौरान और उपचार के दौरान मौत हुई। उन्होंने बताया कि जब से अस्पताल में वेंटीलेटर और एसएनसीयू वार्ड की स्थापना हुई है। तब बच्चों की मौत की संख्या में गिरावट आई है।
संजीवनी अस्पताल, राज अस्पताल, कुंदन अस्पताल में नवजात शिशुओं और उससे थोड़ा ऊपर के बच्चों के लिए इमरजेंसी केयर यूनिट के अलावा अन्य कई सुविधाएं उपलब्ध हैं। रेलवे स्टेशन के पास स्थित संजीवनी अस्पताल के मालिक डाक्टर नवनीत गर्ग बताते हैं कि नर्सरी में ट्रीट वार्मरस, सांस आदि की समस्या को दूर करने की बेहतरीन तकनीक हैं। फोटो थेरेपी यानी बिगड़े पीलिया वाले बच्चों में ब्लड एक्सचेंज करने वाली मशीन की सुविधा भी उपलब्ध है। इसके अलावा आधुनिक टीकाकरण, नेबुलाइजर, पल्स ऑप्सीमेट्री, एनआईसी, पीआईसीयू पीडियाट्रिक इंटर्नशिप केयर यूनिट है। नवजात शिशुओं और बड़े बच्चों के लिए सघन चिकित्सा कक्ष हैं। जनवरी से दिसंबर तक उनके यहां पर 450 बच्चों का जन्म हुआ। इनमें 300 लड़कियां और केवल 150 लड़के शामिल हैं। जबकि करीब 38 बच्चों की मौत हो गई।
राज हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ सिद्धार्थ सिंह ने बताया कि उनके अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए वेंटीलेटर, आईसीयू, टीकाकरण, फोटोथैरेपी आदि की सुविधा है। पूरे साल में करीब 300 डिलीवरी हुई। इनमें 60 प्रतिशत लड़कियां और 40 प्रतिशत लड़के पैदा हुए और करीब 25 बच्चों की मौत हुई।
कुंदन अस्पताल के स्वामी डाक्टर द्विपेंद्र सिंह के अनुसार जो बच्चे प्रीमैैच्योर पैदा होते हैं, तो उन्हें नर्सरी की आवश्यकता होती है। बच्चे जिन्हें नर्सरी की आवश्यकता होती है, उनके लिए 12 बैड की नर्सरी है। होम डिलीवरी और अस्पताल डिलीवरी के अलग-अलग वार्ड हैं। दोनों में वेंटीलेंटर, रिडेंट वार्मर शरीर का तापमान 36.5 से लेकर 37 डिग्री सेल्सियस के बीच रहे। इसमें बच्चे बिना कपड़ों के लेटे रहते हैं, इससे बच्चों की स्थिति का पता चलता रहता है। कुछ भी परेशानी होने पर रिडेंट वार्मर से बाल रोग विशेषज्ञ पकड़ लेते हैं। इसके अलावा न्यूनेटल इंटर्नशिप केयर यूनिट (एनआईसीयू) है। पूरे साल में लगभग 1200 डिलीवरी हुई। इनमें 47 प्रतिशत लड़कियां और 53 प्रतिशत लड़के पैदा हुए। जबकि 65 के आसपास मौतें हुईं।