बिजनौर। बिलाई शुगर मिल को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जल्दी ही 125 करोड़ रुपये मिलेंगे। शुगर प्रमोशन पॉलिसी के तहत मिलने वाली धनराशि के संबंध में मिल प्रशासन ने कोर्ट में सालों से चल रहा केस जीत लिया है। इससे किसानों के गन्ना भुगतान में तेजी आएगी। मिल की मरम्मत से जुड़े काम भी जल्दी शुरू होंगे।
बिलाई शुगर मिल की स्थापना साल 2005-2006 में हुई थी। उस समय प्रदेश में सपा सरकार थी और मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। तब प्रदेश सरकार ने नई शुगर मिलों की स्थापना कराने के लिए शुगर प्रमोशन पॉलिसी शुरू की थी। इसके अंतर्गत शुगर मिलों की स्थापना करने पर सरकार ने कुल लागत की दस प्रतिशत राशि अनुदान के तौर पर वापस लौटाने की बात कही थी। बिजनौर में तब इस पॉलिसी के अंतर्गत बिलाई शुगर मिल की स्थापना की गई थी। लेकिन अगले ही साल हुए चुनाव में सपा सत्ता से बाहर हो गई। प्रदेश में बसपा को बहुमत मिला और मायावती प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं। बसपा सरकार ने शुगर प्रमोशन पॉलिसी को खत्म करते हुए नई स्थापित हुई मिलों को अनुदान देने से मना कर दिया। 2012 में सपा फिर सत्ता में लौटी और मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। लेकिन उन्होंने भी मिलों को अनुदान देने से मना कर दिया। मिल प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार इसके विरोध में बिलाई मिल प्रशासन हाईकोर्ट गया और केस जीत गया। अखिलेश यादव शासन ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गया, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने भी बिलाई मिल को शुगर प्रमोशन पॉलिसी को अनुदान देने का फरमान सुना दिया। मिल प्रशासन केस जीत गया। मिल प्रशासन को अब अनुदान के एवज में 125 करोड़ रुपये मिलेंगे। इस राशि से गन्ना भुगतान किया जाएगा।
सरकार ने वर्तमान में चीनी बेचने के लिए अधिकतम व न्यूनतम कोटा निर्धारित कर रखा है। इससे चीनी के दाम बढ़े हैं। लेकिन चीनी मिल अपनी मनमर्जी के अनुसार भुगतान नहीं दे सकते हैं। बिलाई मिल भुगतान में पिछड़ी हुई है। बिलाई मिल को 125 करोड़ रुपये मिलेंगे तो इतनी बड़ी राशि से गन्ना भुगतान किया जाएगा। इससे किसानों को बहुत राहत मिलेगी।