बिजनौर। बढ़ापुर के वन क्षेत्र में कई दिन पहले उत्तराखंड के जिम कार्बेट पार्क में गजराज को मारा गया होगा और बाद में शव को इस वन क्षेत्र में डाला गया है। जिस इलाके में शव मिला है वह टाइगर रिजर्व क्षेत्र है। किसी के भी इस इलाके में आने जाने पर पाबंदी है। वन विभाग के अफसरों को शक है कि वन क्षेत्र के आसपास डेरा डालकर फेरी करने वाले नवयुवकों ने इस घटना को अंजाम दिया होगा। वन अफसरों को अभी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने का इंतजार है। गजराज का शिकार करने वालों को दबोचने के लिए अफसरों ने अपने घोड़े दौड़ा दिए हैं।
बढ़ापुर के वन क्षेत्र में गजराज के शव के अवशेष मिलने के बाद वन विभाग के अफसरों के होश उड़े हुए हैं। अफसर यह पता लगाने में जुटे है कि किन लोंगो ने घटना को अंजाम दिया। अफसर मान रहे हैं कि गजराज की हत्या कई दिन पहले करके उसके अवशेष वन क्षेत्र में डाले गए हैं। उत्तराखंड राज्य का जिम कार्बेट पार्क व बढ़ापुर के वन क्षेत्र का वह इलाका जहां गजराज के अवशेष मिले हैं , आपस में सटा है। दोनों में एक किमी से भी कम की दूरी है। अफसरों को शक है कि गजराज की हत्या किसी और इलाके में करके अवशेष बढ़ापुर के वन इलाके में डाले गए हैं। सबूत को मिटाने के लिए यह काम किया गया, जहां अवशेष मिले हैं , वह टाइगर रिजर्व इलाका है। इस इलाके में किसी के भी आने जाने पर पूरी तरह रोक है। यह इलाका अति संवेदनशील होने के कारण किसी को वहां नहीं आने -जाने दिया जाता । डीएफओ नजीबाबाद उदयवीर सिंह के मुताबिक गजराज की हत्या कहीं और करके अवशेष बढ़ापुर के वन क्षेत्र में फेंके गए हैं। विभाग की टीम इस घटना के खुलासे में लगा दी गई हैं।
रात में होता है हाथी का शिकार
वन क्षेत्र में गजराज का शिकार तस्कर रात में करते हैं। गुड़ में नशीली या जहरीली गोली मिलाकर वन क्षेत्र में उसेक स्थान पर रखते हैं जहां रात में गजराज के आने की उम्मीद होती है। रात में गजराज पानी पीने के लिए तालाब के आसपास जरूर आता है। तालाब के आसपास ही गुड़ रखा जाता है। एक हाथी का अपने जाल में फांसने के लिए 20 किलो गुड़ की जरूरत होती है। इस गुड़ में नशीली व जहरीली गोली मिली होती है। हाथी के पूरी तरह अचेत होने पर हाथी के दांत निकाले जाते हैं।
हरिद्वार व ऋषिकेश में बिकते हैं हाथी के दांत
अंतरराष्टीय बाजार में हाथी के एक किलो दांत की कीमत 30 हजार रुपये है। हाथी का एक दांत 18 से तीस किलो तक का होता है। हाथी के दांत चोरी छिपे उत्तराखंड राज्य के हरिद्वार, ऋषिकेश में खूब खरीदे जाते हैं। बिजनौर जिले के नगीना में भी ये दांत खूब बिकते हैं। हाथी के दांत लकड़ी की काष्ठकला में नक्कासी के काम में आते हैं। बिजनौर का नगीना काष्ठकला का उद्योग है। यहां देशभर में लकड़ी के बने सामान सप्लाई होते हैं।