भारत-पाक सीमा पर तनाव के चलते पहली बार अमरोहा में ईद मनाने आये 40 पाक नागरिक
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
भारत व पाकिस्तान के बीच रिश्तों में चाहे कितनी भी तल्खी क्यों न आ जाए, मगर दोनों देशों के नागरिक इससे इत्तेफाक नहीं रखते। हिन्दुस्तान की तहजीब की खुुशबू पाक में रह रहे भारतीय नागरिकों पर तीज त्यौहारों पर अपने वतन खींच ही लाती है। देश की सीमाओं को लांघ हर त्योहार रिश्तेदार, परिचितों और संबंधियों संग मनाने आते हैं। भारत-पाक बार्डर पर तनाव चल रहा है। बावजूद इसके ईद-उल-फितर का त्योहार मनाने के लिए पाकिस्तान के 40 लोग अमरोहा जनपद में आये हैं।
वैसे तो आम तौर पर देखें तो गुलाम कश्मीर को लेकर भारत-पाक के बीच रिश्तों में हमेशा तल्खी रही है। हाल ही में भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को कथित तौर पर जासूसी के आरोप में पाकिस्तान में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद से भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में खासा तनाव आ गया है। लगातार बार्डर पर गोली बारी और बमबारी हो रही है। भारतीय सैनिकों पर हमले हो रहे हैं। मगर दोनों देशों के नागरिक इससे दूर हैं। उनको आज भी परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों की रिश्तों की डोर त्योहारों पर आने को मजबूर करती है। खुफिया विभाग के अनुसार पाकिस्तान से अमरोहा जनपद में 40 लोग ईद का त्यौहार मनाने के लिए आए हैं। कई लोगों का परिवार के साथ आगमन हुआ है।
करांची निवासी सैयद नसीम हैदर के शफातपोता में रिश्तेदार शजर अली, मोहम्मद यासीन रहते हैं। आपसी भाईचारे एवं प्रेम के प्रतीक ईद के त्योहार को रिश्तेदारों के साथ मनाने के लिए वह भारत में आए हैं। बेटा मुर्तजा, बेटी दुर्रे नजब और पत्नी कदीरा खातून रिश्तेदारों और परिचितों संग ईद मनाने हिंदुस्तान में आए हैं। अपने रिश्तेदारों और संबंधियों के घर आकर करांची से आया परिवार बेहद खुश है। रिश्तेदार शजर अली व मोहम्मद यामीन के परिवार में खुशियां छाई हैं। नसीम हैदर के बेटे मुर्तजा और बेटी दुर्रे नजब का कहना है कि यहां आकर उनको बेहद अच्छा लग रहा है। हिंदुस्तान की तहजीब की खुशबू ईद पर यहां खींच लाई है। कल ईद पर रिश्तेदारों के घर मौज करेंगे। सिवईं खाने को मिलेंगी। दोस्तों, परिचितों संग गले मिल कर ईद की मुबारकबाद देंगे।
बंटवारे में चले गए थे पाक
करांची से अमरोहा में परिवार के साथ आए सैयद नसीम हैदर के पूर्वज बंटवारे के दौरान पाकिस्तान चले गए थे। शहर के शफातपोता मोहल्ले में उनके पुरखे रहते थे। जब पाकिस्तान व भारत का विभाजन हुआ तो नसीम हैदर के वालिद सैयद आमिन हुसैन पाकिस्तान में बस गए। पाकिस्तान जाने के बाद भी हिंदुस्तानी तहजीब को नहीं भूले। ईद का त्योहार परिजनों और रिश्तेदारों के साथ मनाने के लिए हर साल यहां आते हैं।
संबंध मजबूत करने को की शादी
सैयद नसीम हैदर के पूर्वज बंटवारे के दौरान पाकिस्तान के कराची शहर में जाकर रहने लगे। मगर हिंदुस्तान में रह गए अपने रिश्तेदार और संबंधियों को नहीं भूले। उनसे दिली रिश्ता मजबूत रखना चाहते थे। जिससे एक दूसरे का इधर-उधर आना जाना लगा रहे। इसके लिए सैयद नसीम हैदर की शादी अमरोहा के शफातपोता मोहल्ला निवासी कदीरा खातून के साथ की। शादी के बाद दोनों के परिजनों का हिंदुस्तान व पाकिस्तान आना जाना लगा रहा।
पत्नी की राष्ट्रीयता से मिली मदद
रिश्तेदारों और संबंधियों संग शहर के शफातपोता मोहल्ले में ईद मनाने आए करांची निवासी सैयद नसीम हैदर को विदेश आने में पत्नी बश्दीरा खातूून की राष्ट्रीयता से बड़ी मदद मिली। चूंकि फिलहाल में पाकिस्तान व भारत के बीच रिश्ते अच्छे नहीं हैं। इसके लिए दोनों देशों के नागरिकों को इधर उधर आने जाने में दिक्कत सामने आ रही है। बड़ी छानबीन के बाद ही वीजा मिल रहा है। मगर कदीरा खातून की राष्ट्रीयता भारतीय है। जिसके कारण नसीम हैदर के परिवार को भारत आने में खासी मदद मिली।
(सुरक्षा कारणों से फोटो से इनकार किया गया है। एलआईयू ने भी इसकी अनुमति नहीं दी।)