बिजनौर। ट्रैंच विधि से बोए जाने वाले शरदकालीन गन्ने को रोग रहित करने की कवायद भी शुरू की गई। मिलों में लगे प्लांट में भाप से गन्ने के बीज का शोधन किया जाएगा। इससे गन्ने को करीब आधा दर्जन रोगों से छुटकारा मिल जाएगा। शोधित कर बोए बीज से तैयार फसल में तीन साल तक कोई रोग नहीं आएगा।
शरदकालीन गन्ना बोने में जिले के किसान खासी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। शुगर मिलों ने इस साल 10 हजार हेक्टेयर जमीन में शरदकालीन गन्ना बोने का लक्ष्य रखा है। गन्ने में स्मट, ग्रासी शूट, रेड रॉट, ब्लिंट, पोक्का बोइंग आदि रोग आते हैं। खेत में खड़ी 25 से 30 प्रतिशत फसल रोगों की चपेट में आने से इनका पता चलता है। इन रोगों से फसल तो प्रभावित होती ही है, साथ ही किसानों का पेस्टीसाइट आदि का खर्च भी बढ़ जाता है। इन रोगों से निजात दिलाने के लिए द्वारिकेश शुगर मिल, बहादरपुर, धामपुर, स्योहारा व नजीबाबाद शुगर मिल ने अपने परिसर में एमएचएटी (मोइस्ट हीट एयर ट्रीटमेंट) प्लांट लगाए गए हैं। इस प्लांट में गन्ने को बीज को भाप से शोधित किया जाएगा। भाप गन्ने के सूक्ष्म छिद्रों से अंदर जाकर अनेक रोगों के फंगस व वायरस को खत्म कर देती है। शोधित किए गए बीज से तैयार फसल में तीन साल तक रोग नहीं आएगा। बीज शोधित करने के लिए शुगर मिलें किसानों से कोई शुल्क भी नहीं ले रही हैं।
डीसीओ ओपी सिंह के अनुसार बीज शोधित करने से किसान की फसल रोग रहित होगी। इससे उत्पादन भी अधिक होगा व किसानों का पेस्टीसाइट के प्रयोग का खर्च भी कम होगा। किसान बीज शोधित करके ही गन्ना बोएं।