बिजनौर। जनपद में दो साल पूर्व एनएचम में हुए घोटाले की रकम को वर्तमान में भी ऑन रिकॉर्ड दर्शाया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग इसे अभी भी घोटाला नहीं मान रहा है जबकि बैंक से फर्जी कंपनियों के खातों में यह रकम डाल दी गई थी।
वर्ष 2016 में एनएचएम में तीन करोड़ 10 लाख रुपये का घोटाला सामने आया था। घोटाले में कानपुर सहित कई जिलों की पांच फर्मों को पेमेंट कर दिया गया था। इस मामले में दो कर्मचारी जेल गए थे। साथ ही तत्कालीन सीएमओ मनमोहन अग्रवाल, सुखवीर सिंह, एसीएमओ पीआर नायर, शैलेश जैन आदि के खिलाफ जांच की गई थी। इन अफसरों ने अपने हस्ताक्षर न होने की बात कही थी। लखनऊ की टीम ने आकर इस मामले की जांच की थी। पुलिस जांच में फर्में नहीं मिली थीं। इसके बाद से जांच अधर में पड़ी है। यहां लोकल स्तर के अधिकारियों ने भी इस मामले में कोई खास कार्रवाई नहीं की। वर्तमान में यह मामला सीबीआई के पास है। बताया गया था कि एनएचएम घोटाले में गई यह रकम संविदा कर्मचारियों को दिए जाने वाले मानदेय की थी। अफसरों के मुताबिक डीपीएम ने अपने कागजों में यह रकम कम नहीं की है। इस कारण संविदा कर्मियों को दिए जाने वाले मानदेय की रकम को काटकर जारी किया जा रहा है। एनएचएम में तैनात संविदा कर्मी ओर डाक्टरों का आरोप है कि उन्हें मानदेय नहीं मिल रहा। एसीएमओ रोहताश कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। अगर ऐसा है तो बिल्कुल गलत है। शीघ्र ही मामले जांच कराकर रिकॉर्ड ठीक कराया जाएगा।