काबे से करबला तक दीवारे फातिमा हैं...
नजीबाबाद। दरगाह-ए-आलिया नजफ-ए-हिंद जोगीरम्पुरी में जश्न-ए-जहरा का आयोजन किया गया। विभिन्न क्षेत्रों से आए शायरों ने अपने ताजा कलाम से जश्न-ए-जहरा कार्यक्रम को रौनक बख्शी।
दरगाह कमेटी के प्रशासक कैसर अली बाकरी की उपस्थिति में दरगाह परिसर के शम्सुल हसन हाल में महफिले मसालमा आयोजित किया गया। नसीर आजमी के संचालन में आयोजित मसालमा में हैदर किरतपुरी का कलाम चौदह सदी से अब तक कायम उसी तरह है/मजबूत देखो कितना मयारे फातिमा है..., महेंद्र अश्क का कलाम साये में अंबिया को मिलती है जिससे राहत/काबे से करबला तक दीवारे फातिमा है... को सुनकर लोग झूम उठे। मसालमा में अली इमाम नौगानवी, कलीम असगर, शहंशाह बिजनौरी, डॉ. गुलशन बिजनौरी, रजा सिरसवी, सज्जाद बिजनौर, प्रोफेसर अजीज जैवी सहित अनेक शायरों ने कलाम पेश किए। इससे पूर्व जायरीनों को खिताब करते हुए मुंबई से आए मौलाना अहमद अली आब्दी ने हजरत इमाम हुसैन और उनके खानदान से जुड़े लोगों की इस्लाम और इंसानियत के लिए दी गई कुर्बानियों को याद किया। जश्न-ए-जहरा में मौलाना वसीम रिजवी, रिहान हैदर, डॉ. शुजा हैदर, मौलाना आबिद मेहंदी, मुख्तारुल हसन, इरफान हैदर, फिरोज हैदर, असद अब्बास सहित अनेक लोगों ने शिरकत की।