वेव ग्रुुप की चीनी है बंधक, प्रशासन नहीं करा सकता है नीलाम
बिजनौर। वेव ग्रुप के गन्ना भुगतान में पिछले साल की ली गई सीसीएल रोड़ा बनी है। वेव ग्रुप की बिजनौर और चांदपुर चीनी मिल ने पिछले साल की चीनी पर पहले से ही लोन ले रखा है। यह चीनी बैंक के पास गिरवी पड़ी है। तकनीकी आधार पर प्रशासन इस चीनी को नीलाम नहीं करा सकता है। अगर प्रशासन इस चीनी को नीलाम कर सकता तो भी किसानों का गन्ना भुगतान हो सकता था।
वेव ग्रुप की चीनी मिल बिजनौर व चांदपुर ने पिछले साल का गन्ना भुगतान अब तक नहीं किया है। बिजनौर चीनी मिल पर करीब साढ़े 26 करोड़ व चांदपुर चीनी मिल पर करीब साढ़े 35 करोड़ का बकाया शेष है। गन्ना भुगतान कराने के लिए चीनी मिल बैंकों से सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) बनवाकर लोन लेती हैं। बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने भी पिछले पेराई सत्र में बनी चीनी पर लोन लिया था। लोन पर मिली राशि को भुगतान आदि में खर्च किया गया है। वर्तमान में भी बिजनौर चीनी मिल पर एक लाख 44 हजार तथा चांदपुर चीनी मिल पर 1.12 लाख क्विंटल चीनी बची है, लेकिन इस चीनी पर पहले ही सीसीएल बनवाई जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार दोनों चीनी मिलों ने सवा करोड़ से ज्यादा की सीसीएल बनाई थी। यह चीनी बैंक के पास गिरवी पड़ी है। अगर चीनी मिल इस चीनी को बेचती है तो इसका भुगतान बैंक को जाएगा। प्रशासन इस चीनी को नीलाम नहीं करा सकता है। अगर प्रशासन इस चीनी को नीलाम भी कराए तब भी इसका भुगतान बैंक को ही जाएगा।
यह हो सकता है समाधान
किसानों के भुगतान के लिए ग्रुप की मिलों को सोफ्ट लोन देना सबसे कारगर तरीका है। इससे किसानों का भुगतान एकदम हो जाएगा। इसके अलावा नए पेराई सत्र की चीनी पर सीसीएल देकर भी किसानों का भुगतान कराया जा सकता है।
किसान को भुगतान से मतलब
आजाद किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह के अनुसार किसान को तो भुगतान से मतलब है। चीनी मिल लाभ होने पर किसान को भुगतान से अलग फूटीकौड़ी नहीं देती हैं। अगर चीनी मिलों को नुकसान है तो इसका सामना भी उन्हें खुद करना है। किसानों को समय से भुगतान मिलना ही चाहिए।