11 साल बाद परिजनों को मिली बिछड़ी बेटी
चांदपुर। 11 साल बाद बिछड़ी बेटी परिजनों को मिल गई। बेटी को गले लगाते ही परिजनों के आंसू छलक आए। 11 साल पहले घर की चाबी खोने पर पिटाई के डर से बच्ची घर के भागकर ट्रेन में बैठकर चली गई थी। सोशल मीडिया से बेटी का पता चलने के एक सप्ताह बाद परिजन बेटी को घर ले आए।
मोहल्ला सराय रफी निवासी सुशील कुमार की सात वर्षीय पुत्री काजल उर्फ पूजा 2007 में लापता हो गई थी। एक सप्ताह पूर्व सोशल मीडिया के माध्यम से किशोरी के शिमला में बालिका आश्रम में होने का पता लगा था। कोतवाली प्रभारी दुर्गेश कुमार मिश्रा के सहयोग से माता-पिता बेटी को वापस लाने के लिए उत्सुक थे। नगर के डॉ. भूपेंद्र तोमर के सहयोग से बेटी के माता-पिता बुधवार रात काजल को बालिका आश्रम से लेकर अपने घर पहुंचे। बृहस्पतिवार को काजल उर्फ पूजा ने बताया कि खेलते समय उससे घर की चाबी खो गई थी। पड़ोस के बच्चों ने उसके मन में पिटाई का डर बैठा दिया था। जिसके कारण वह घर के पास स्थित रेलवे स्टेशन पहुंचकर ट्रेन में बैठ गई और दिल्ली पहुंची। उसके बाद भूखी प्यासी मुंबई पहुंच गई। मुंबई में रोती बच्ची को देख पुलिस वालों ने पूछताछ की तो वह पुलिस को केवल चांदपुर का नाम बता सकी। पुलिस ने मुंबई के पास स्थित एक चांदपुर कस्बे में भेज दिया था। करीब पांच साल वहां रही। उसके बाद उसे पंचकूला के पास कस्बा चांदपुर का पता लगने पर पंचकुला पुलिस को सौंप दिया गया। पंचकुला पुलिस ने भी उसके परिजनों का पता न लगने पर शिमला के बालिका आश्रम में भेज दिया। काजल ने बालिका आश्रम में रहते हुए कक्षा नौ की पढ़ाई पूरी की। डॉ. भूपेंद्र तोमर ने उसकी आगे की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए परिजनों से वादा किया है।