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एक दशक में आतिशबाजी ले चुकी 18 लोगों की जान

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बिजनौर में जोधोवाला रोड पर पटाखा फैक्टरी में आग लगाने के बाद डॉग स्वाक्यड के साथ जांच करती टीम। - फोटो : BIJNOR
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बिजनौर। जिले में आतिशबाजी पहले भी लोगों की जान ले चुकी है। बिजनौर, नहटौर और चांदपुर में कुछ साल पहले हुए हादसों में 13 लोगों की जान जा चुकी है। बृहस्पतिवार को बिजनौर में हुए अग्निकांड के साथ ही पिछले एक दशक में आतिशबाजी से मरने वालों का आंकड़ा 18 पर पहुंच गया है। इसके बावजूद न तो पुलिस जागी और न ही प्रशासन ने इससे सबक लिया। वहीं लोग अपने छोटे लालच में लोगों की जान जोखिम में डालने से बाज नहीं आ रहे।
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जिले में आतिशबाजी का कई सालों से खेल चल रहा हैं। बिजनौर के अलावा चांदपुर किरतपुर, नहटौर, नजीबाबाद समेत जिले के कई शहरों में चोरी छिपे आतिबाजी बनाई जाती है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 14 जुलाई 2015 को बिजनौर से सटे गांव बकली में आतिशबाजी बनाते समय हुए विस्फोट में दो लोगों की जान गई थी। नहटौर के मोहल्ला 2014 में आतिशबाजी के कारण ही एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई थी। चांदपुर में भी मकान में आतिशबाजी बनाते समय विस्फोट हुआ था, जिसमें छह लोग मारे गए थे और मकान के परखच्चे उड़ गए थे।
आतिशबाजी निर्माण के केवल छह लाइसेंस
फैक्टरी के स्वामी यूसुफ के पास आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस है, इसका नवीनीकरण 2025 तक है, लेकिन यह निर्धारित जगह के अलावा भी अवैध रूप से आतिशबाजी बनवा रहा था। पूरे जिले में कुल 29 लाइसेंस है। इनमें 20 विक्रय के और छह आतिशबाजी बनाने के लाइसेंस हैं। दमकल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यूसुफ की लाइसेंसी फैक्टरी में आतिशबाजी बनाने के सारे मानक पूरे हैं।
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