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वेव की चीनी मिलों ने किया आवेदन

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वेव ग्रुप ने सोफ्ट लोन के लिए फिर से किया आवेदन
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बिजनौर। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिलों ने सोफ्ट लोन के लिए फिर से शासन में आवेदन कर दिया है। इस बार ग्रुप को लोन मंजूर होने की पूरी उम्मीद है। शासन से लोन स्वीकृत होने ही किसानों का बकाया भुगतान सीधा किसानों के खातों में जाएगा। इससे पहले शासन ने वेव ग्रुप की चीनी मिलों को सोफ्ट लोन देने से मना कर दिया था।
2010 में सरकारी क्षेत्र की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल वेव ग्रुप को बेच दी गईं थी। वेव ग्रुप की झोली में जाने के बाद हर साल बिजनौर चीनी मिल के संचालन में कोई न कोई दिक्कत आती रहती है। ग्रुप की दोनों चीनी मिलों ने पिछले पेराई सत्र का भुगतान अब तक नहीं किया है। बिजनौर चीनी मिल पर 26.50 करोड़ तथा चांदपुर चीनी मिल पर 35.63 करोड़ रुपये अब तक बकाया है। दिसंबर में प्रदेश सरकार ने चीनी मिलों को सोफ्ट लोन दिया था। उस लोन से किसानों का भुगतान किया गया था। यह रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजा गया था। तब बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल ने भी सोफ्ट लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका लोन मंजूर नहीं किया गया था। माना गया था कि मिल बिकने के मामले में चल रही सीबीआई जांच के कारण लोन मंजूर नहीं किया गया है। अब सरकार ने चीनी मिलों को सोफ्ट लोन देने की समय सीमा और बढ़ाई है। नियम के अनुसार चीनी मिलों को लोन के लिए फिर से आवेदन करना था। वेव ग्रुप की चीनी मिलों ने लोन के लिए फिर से आवेदन कर दिया है। भुगतान के लिए जिले भर में अनेक किसान संगठन आंदोलन कर रहे हैं। माना जा रहा है कि किसानों के आंदोलन को देखते हुए इस बार सोफ्ट लोन को मंजूरी मिल सकती है। बिजनौर चीनी मिल के प्रशासनिक अधिकारी एके सिंह ने मिल द्वारा सोफ्ट लोन के लिए फिर से आवेदन किए जाने की पुष्टि की है।
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पुराना स्टॉक है गिरवी
बिजनौर व चांदपुर मिलों के पास पिछले साल की चीनी का अब भी बहुत स्टॉक है। लेकिन मिल ने इस चीनी पर सीसीएल यानि केश क्रेडिट लिमिट बनवा रखी है। सामान्य भाषा में कहें तो इस चीनी पर बैंक से लोन ले रखा है। यह चीनी बैंक को गिरवी है। अगर प्रशासन यह चीनी बिकवाता है तब भी इससे मिलने वाली रकम बैंक को जाएगी।
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सीसीएल की फाइल भी अटकी
बैंक द्वारा चालू पेराई सत्र के गन्ना भुगतान के लिए भी सीसीएल मांगा गया है। लेकिन सोफ्ट लोन की तरह सीसीएल की फाइल भी शासन में दब गई है। सीसीएल न मिलने पर फिर से भुगतान की समस्या खड़ी हो सकती है।
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