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मौसम की मार, जिला अस्पताल की ओपीडी 1500 के पार

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अमरोहा। बारिश के बाद धूप से वातावरण में उमस हो गई। ताल पोखरों और गड्ढों में भरा बारिश का पानी उतरने लगा है। ये बदला मौसम लोगों को बीमार बनाने के लिए काफी है। यही वजह है कि सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ उमड़ पड़ी। ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा पंद्रह सौ के पार पहुंच गया। जबकि आम दिनों में मरीजों की संख्या पांच सौ से छह सौ के बीच होती है।
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मौसम की मार ने लोगों को बीमार बना दिया है। जहां चिकित्सकों को दिखाने के लिए मरीजों से जिला अस्पताल खचाखच भर गया। वहीं वार्ड भी मरीजों से भरे पड़े हैं। बावजूद इसके मरीजों के आने का क्रम जारी है। ओपीडी में इलाज कराने को मरीजों की संख्या भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई है। मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पताल में अव्यवस्था हावी रही। कई जगह लाइन में लगे मरीजों में धक्कामुक्की का सामना करना पड़ा। शुक्रवार की रात और शनिवार की तड़के हुई बारिश के बाद सोमवार को मौसम एकदम से बदल गया। एकाएक मौसम की बदलाव से लोग फीवर, मलेरिया, टाइफाइड, उल्टी-दस्त की चपेट में तेजी से आ रहे हैं। इतना ही नहीं आंखों में भी तेजी से संक्रमण फैल रहा है। सीएमएस डा. रामनिवास ने बताया कि पिछले एक पखवाड़े के मुताबिक सोमवार को अस्पताल में आने वाले मरीजों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। सोमवार को मरीजों का आंकड़ा 1500 सौ के पार पहुंच गया। दर्जन भर नए मरीजों भर्ती कराया गया है।

अस्पताल में अव्यवस्थाएं हावी
अमरोहा। जिला अस्पताल में दुर्व्यवस्था के चलते वार्डों में उठ रही दुर्गंध से मरीजों और तीमारदारों का जीना मुहाल हो गया है। अन्य असुविधाएं भी अस्पताल में हावी दिख रही है। ओपीडी में मरीजों की भारी भीड़ के कारण चिकित्सकों का हाल बेहाल है। आलम यह है कि एक चिकित्सक प्रतिदिन 250 मरीजों तक देख रहे हैं। सुबह से दोपहर तक कक्ष में मरीजों की भारी भीड़ से चिकित्सकों को भी दिक्कत हो रही है।
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बच्चों-बुजुर्गों पर पड़ रही बदलते मौसम की मार
अमरोहा। कभी गर्मी तो कभी बारिश पड़ने के बाद उमस जैसे बदलते मौसम की ज्यादातर मार बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ी रही है। गर्मी में खानपान घातक साबित हो रहा है। जिससे बच्चे और बुजुर्ग डायरिया की चपेट में आ रहे है। माताएं छोटे बच्चों के इलाज के लिए लेकर अस्पताल पहुंच रही हैं।
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चिकित्सकों की राय
अमरोहा। बाल रोग विशेषज्ञ डा. राजकुमार का कहना है कि ऐसे मौसम में सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज है। पानी उबाल कर पीएं, छोटे बच्चों को निप्पल से दूध न पिलाएं। ईएमओ डा. चंद्रभान सिंह चौहान ने बताया कि बाजार में बिकने वाले कटे फलों और खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें और ताजा भोजन ही खाएं।
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डायरिया से बचाव के घरेलू उपाय
- डायरिया होने पर 1 से 2 घंटे के अंतराल पर कम से कम 1 लीटर से ज्यादा पानी पीना चाहिए।
- डायरिया होने पर तरल व खनिज लवण की कमी को पूरा करने के लिए ओआरएस का घोल पिएं।
- अदरक का रस, नीबू का रस और काली मिर्च का पाउडर पानी में मिलाकर पीने से राहत मिलती है।
- डायरिया में चावल बहुत कारगर होता है।
- डायरिया होने पर भोजन बिलकुल बंद न करें।
- डायरिया में पर्याप्त मात्रा में पोषक और तरल पदार्थ लेना चाहिए।
- डायरिया से निजात पाने के 48 घंटे तक मसालेदार खाना, फल और एलकोहल का प्रयोग न करें।
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