‘कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि से होता है कैंसर’
बिजनौर। कैंसर महामारी के रूप में उभर कर सामने आ रहा है। सही जानकारी के अभाव में लोग इसका सामान्य रूप से इलाज नहीं करा पा रहे हैं। चिकित्सकों की मानें तो कैंसर शरीर के किसी भी अंग को प्रभावित कर सकता है। यह रोग शरीर की सतह पर भी हो सकता है और अंदरूनी हिस्सों में भी इसके होने की प्रबल संभावना रहती है। चिकित्सक कैंसर का मुख्य कारण शरीर के किसी भी अंग की कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि को मानते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए हमें अपने खानपीन और दिनचर्या में बदलाव लाने की आवश्यकता है।
कैंसर एक भयंकर बीमारी है, इसका नाम सुनते ही रूह कांप उठती है। कैंसर शरीर के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों में हो सकता है। चिकित्सकों के अनुसार 40 प्रतिशत कैंसर धूम्रपान करने से होते हैं। इनमें गुटखा, पान, बीड़ी, सिगरेट, शराब आदि शामिल हैं। इसलिए इन सभी चीजों से बचकर रहने से ही कैंसर को मात दी जा सकती है। रोटरी क्लब इंडस्ट्रियल एरिया और वेलेंटिस कैंसर हॉस्पिटल मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ नीरज गुप्ता की पांचवीं पुण्य तिथि पर सुमित्रा नर्सिंग होम पर नि:शुल्क कैंसर जांच शिविर लगाया गया। जिसमें मेरठ के कैंसर फिजीशियन अमित जैन ने बताया कि आमतौर पर होता ये है कि लोग जानकारी के अभाव में रोग कोई और होता है और वे लंबे समय तक दवा किसी अन्य मर्ज की चलाते रहते हैं। इससे वह रोग बढ़ता जाता है और आखिरी स्टेज पर पहुंचकर लाइलाज हो जाता है। इसलिए एक माह से अधिक बुखार रहने या अन्य बीमारियों जैसे बलगम के साथ खून आना, कई माह तक लगातार कमर में दर्द आदि रहने पर कैंसर संबंधी जांच अवश्य कराएं ताकि शुरुआती स्टेज में ही रोग की स्थिति स्पष्ट हो जाए।
छूआछूत से नहीं फैलता कैंसर : डॉ. संतोष कुमार
कैंसर सर्जन संतोष कुमार सिंह ने बताया कि भारत में मुंह के कैंसर के कारण सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। इसका मुख्य कारण धूम्रपान और तंबाकू है। इसलिए तंबाकू का सेवन और धूम्रपान न करें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। उन्होंने बताया कि कैंसर के प्रति लोगों में काफी भ्रांतियां हैं कि कैंसर छुआछूत से होता है। इसके रोगी से गले नहीं मिलना चाहिए और हाथ भी नहीं मिलाना चाहिए। लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। सभी लोगों को चाहिए कि वे कैंसर रोगियों से हाथ भी मिलाएं और गले भी मिलें जिससे रोगियों में हीन भावना पैदा न हो। डॉ. संतोष ने सलाह दी कि हर व्यक्ति को प्रतिदिन व्यायाम जरूर करना चाहिए। साथ ही केमिकल युक्त खाद्य और पेय पदार्थों से परहेज करत हुए अपने आसपास में साफ सफाई रखनी चाहिए। जिससे कैंसर के साथ-साथ अन्य गंभीर बीमारियों से भी बचा जा सके।
ये हैं कैंसर की चार मुख्य अवस्थाएं
चिकित्सकों के अनुसार पहली और दूसरी अवस्था में कैंसर का ट्यूमर छोटा होता है और आसपास के टिश्यूज की गहराई में नहीं फैलता है। तीसरी कंडीशन में कैंसर विकसित हो चुका होता है। ट्यूमर बड़ा हो चुका होता है और इसके अन्य अंगों में फैलने की संभावना बढ़ जाती है। चौथी स्थिति कैंसर की आखिरी स्थिति होती है। इससे कैंसर अपने शुरुआती हिस्से से अन्य अंगों में फैल जाता है, इसे विकसित मैटास्टेटिक कैंसर कहा जाता है। कैंसर रोग विशेषज्ञ कहते हैं कि कैंसर तीन प्रकार से शरीर में फैलता है। डायरेक्ट या इंवेजन, जिसमें प्राइमर ट्यूमर आसपास के अंगों और टिश्यूज में फैलता है। उदाहरण के लिए प्रोस्टेट कैंसर ब्लैडर तक पहुंच जाता है।
ये हैं कैंसर के प्रमुख लक्षण
प्राइमरी ट्यूमर से टूटकर शरीर के दूसरे अंगों तक चली जाती है। लिम्फेटिक सिस्टम टिश्यूज और अंगों का ऐसा समूह है जो संक्रमण और बीमारियों से लड़ने के लिए कोशिकाएं बनाकर इन्हें स्टोर रखता है। कैंसर के आम लक्षण हैं वजन में कमी, बुखार, भूख में कमी, हड्डियों में दर्द, खांसी या मुंह से खून आना, अगर किसी भी व्यक्ति को ये लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत चिकित्सकों से संपर्क करना चाहिए। चिकित्सकों के अनुसार भारत में सबसे ज्यादा मुंह, स्तन, सर्वाइकल, फेफड़ों और प्रोटेस्टेट का कैंसर देखने को मिलता है। इनमें 60 फीसदी मामले मुंह, स्तन एवं गर्भाश्य कैंसर के होते हैं, हालांकि इनका निदान आसान है। लेकिन पूरा इलाज सिर्फ शुरुआती अवस्था में ही संभव है।
कैंसर शिविर में की गई 84 मरीजों की जांच
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बिजनौर। जिले के वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ नीरज गुप्ता की पांचवीं पुण्य तिथि पर सुमित्रा नर्सिंग होम पर आयोजित विशाल नि:शुल्क कैंसर शिविर में दिल्ली और मेरठ से आए कैंसर रोग विशेषज्ञों ने रोगियों का परीक्षण कर उन्हें जांच कराने की सलाह दी। इस दौरान 84 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई। वरिष्ठ हड्डी रोग विशेषज्ञ नमन गुप्ता, कैंसर फिजीशियन अमित जैन, कैंसर सर्जन संतोष कुमार सिंह का कहना है कि नियमित व्यायाम और उचित खान पान कैंसर को मात दी जा सकती है। शिविर में 84 मरीजों की जांच कर उन्हें टेस्ट कराने की सलाह दी गई। इस अवसर पर संयोजक डॉ. एके अग्रवाल, डॉ. अशोक चौधरी, रजनीश अग्रवाल, राकेश गुलाटी, राकेश रस्तोगी, नीरज चौधरी, डॉ. नमन गुप्ता, डॉ. राकेश गुप्ता, नागेंद्र कुमार सारस्वत आदि मौजूद रहे।