विदुरकुटी पर सफाई अभियान बना औपचारिकता
गंज दारानगर। महात्मा विदुुर की तपोभूमि से शुरू किया गया स्वच्छ ग्राम और स्वच्छ जिला अभियान औपचारिकता बनकर रह गया। कार्यक्रम में सफाई का काम केवल खानापूर्ति के लिए ही हुआ। डीएम के मौके से जाते ही स्वयंसेवक खिसक गए। विद्यार्थियों ने ही सफाई अभियान चलाया। सफाई के लिए फावड़ों और तसलों का इंतजाम तक नहीं था।
गांवों को खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए स्वच्छ ग्राम और स्वच्छ जिला अभियान चलाया जा रहा है। गांवों की सफाई के आधार पर जिलों को रैंक दी जाएगी। विदुरकुटी से इस अभियान का शुभारंभ मंगलवार को किया गया। जिलाधिकारी अटल कुमार राय ने श्रमदान करके इस कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके बाद डीएम ने अधिकारियों के साथ पौधारोपण किया और लौट आए। डीएम के जाते ही सफाई अभियान चलाने के लिए आए स्वयंसेवक, सफाई कर्मी भी खिसक गए। सफाई अभियान के लिए पहले से कोई प्लानिंग नहीं की गई थी। न तो कोई सेक्टर बनाया गया था और न ही किसी को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई। केवल गुरु ग्रह इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने ही सफाई अभियान चलाया। सफाई करने के लिए विद्यार्थियों को फावडे़ और तसले तक भी नहीं दिए गए थे। विद्यार्थियों ने अपने हाथों से ही सफाई की।
इस मामले का पता चलने पर डीएम नाराज हो गए। उन्होंने दोपहर को डीपीआरओ मनीष कुमार को मौके पर भेजा और सफाई अभियान चलवाया। इस अवसर पर नमामि गंगे योजना के संयोजक सौरभ सिंघल, गुरु ग्रह कॉलेज के प्रिंसिपल कैलाशचंद, ग्राम प्रधान वीरेंद्र कुमार, डीपी सिंह कसाना, जनार्दन अग्रवाल, नीरज तोमर डीलर, देवराज जोशी, रवि आर्य, डॉ. रामअवतार शर्मा, अवनीश सिंह, सुभाष, रिंकू शर्मा आदि मौजूद रहे।
क्षेत्र गण्यमान्य लोगों को नहीं दी सूचना
ऐसे अभियानों में जनपद और क्षेत्र के प्रमुख व्यक्तियों को बुलाया जाता है। ताकि लोग प्रोत्साहित हो और खुद आगे बढ़कर काम करें। क्षेेत्र में दो पूर्व राज्यमंत्री स्वामी ओमवेश और ओमपाल सिंह नेहरा रहते हैं, उन्हें भी नहीं बुलाया गया। ओम पाल सिंह नेहरा का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं है। ऐसा ही स्वामी ओमवेश का कहना है। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र चौधरी ने भी बताया कि उन्हें नहीं बुुलाया गया।
शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं
जनपद खुले में शोच मुक्त घोषित हो चुका है। पांच हजार व्यक्तियों को बुलाया गया, किंतु उनके लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। विदुर कुटी के सामने पर्यटन विभाग द्वारा बनाए शौचालय हैं किंतु उन पर भी ताले लगे थे। गांव के प्रधान वीरेंद्र कुमार ने स्वीकारा कि सफाई कर्मी सफाई के उपकरण लाए थे। बाकी की कोई व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने स्वीकारा कि प्राकृतिक जरूरत का भी कोई प्रबंध नहीं था। उन्होंने माना कि एक हजार 1500 के आसपास कार्यकर्ता और कर्मचारी आए।
बहुत याद आए इंद्रमणि त्रिपाठी
यहां से तबादले पर गए मुख्य विकास अधिकारी इंद्रमणि त्रिपाठी बहुत याद आए। गंगा बैराज पर कई बार सफाई अभियान चला। हर बार कार्य व्यवस्थित हुआ। सैंक्टर बांट कर कार्य कराया गया। पीने के पानी के टैंकर और सचल शौचालय की व्यवस्था भी होती थी। इस बार सब अव्यवस्थित नजर आया।