15 मदरसों का मानदेय लटका
बिजनौर। जिले के 15 मदरसों के शिक्षकों का मानदेय लटक गया है। ये सभी मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। मानदेय पर शासन की चुप्पी से मदरसों के शिक्षकों में खलबली मची है।
जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के मुताबिक जिले में 620 मदरसे हैं। इनमें 220 मदरसे आधुनिकीकरण योजना में अधिग्रहित हैं। पहले मदरसों को मान्यता डीआईओएस या बीएसए कार्यालय से मिलती थी। जिले में इस श्रेणी के 15 मदरसे डीआईओएस या बीएसए द्वारा मान्यता प्राप्त हैं। शासन ने अल्पसंख्यकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए अलग से अरबी फारसी बोर्ड का गठन किया है। इसके बाद मदरसों के मान्यता की प्रक्रिया बोर्ड से लेनी अनिवार्य कर दी गई। शासन ने यह भी निर्देश दिए कि बोर्ड से मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों को ही राज्य सरकार मानदेय देगी।
शासन ने पूर्व में डीआईओएस या बीएसए से मान्यता प्राप्त मदरसों को अपनी मान्यता अरबी फारसी बोर्ड से कराने के निर्देश दिए। 15 मदरसों ने तय समय में अरबी फारसी बोर्ड से मान्यता नहीं कराई। इसकी सूचना शासन को भेज दी गई थी। 15 मदरसों के शिक्षकों को मानदेय मिलने का काम अधर में लटक गया है। विभाग द्वारा मानदेय के बारे में कई बार स्मरण पत्र भेजने के बाद भी शासन चुप्पी साधे हुए है। प्रवीण कुमार मिश्र के अनुसार शासन ने आलिया के परीक्षा फार्म विभाग के पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। प्रधानाचार्य फार्म छात्रों को वितरित करेगा। इसके बाद प्रधानाचार्य आन लाइन फिडिंग करेंगे।