आजमीन-ए-हज को अरकान अदा करने का तरीका बताया
नींदडू़। उलेमा ने हज के मुकद्दस सफर पर जाने वाले आजमीन-ए-हज को हज के दौरान अदा किए जाने वाले अरकान की जानकारी के साथ विधिवत ट्रेनिंग दी। साथ ही एहराम बांधने का तरीका बताया।
बृहस्पतिवार को मदरसा बहरूल उलूम लक्खी बाग़ में आयोजित एकदिनी हज तरबियत कैंप में मुफ्ती मोहम्मद असलम ने उपस्थित आजमीन-ए-हज को हज के दौरान अदा किए जाने वाले तमाम अरकान (क्रियाएं) की विस्तृत जानकारी दी। काबा के प्रारूप के समक्ष विभिन्न अरकान करके दिखाए। उन्होंने एहराम (सफेद रंग की दो चादर) शरीर पर लपेटने, तलबियाह (ऐ अल्लाह मैं हाजिर हूं,) पढ़ने, ख़ाना-ए-खुदा (काबा) के तवाफ (परिक्रमा) का तरीका और सफा व मरवाह नामक पहाड़ियों के बीच सई (दौड़ लगाना) की बारीकियां समझाईं। इससे पहले मुफ्ती मोहम्मद इफ्तेखार ने आजमीन-ए-हज को कफन का प्रतीक सफेद एहराम बांधने का तरीका बताया।
मोलवी असरार अहमद की अध्यक्षता एवं कारी मोहम्मद अरशद के संचालन में कार्यक्रम का आग़ाज मौलाना अब्दुल अलीम द्वारा कुरआन पाक की तिलावत से हुआ। कारी मुबीन अहमद ने नात-ए-पाक पेश की। हाजी अशरफ अली ठेकेदार के विशेष सहयोग से मदरसे में आयोजित एक दिवसीय हज ट्रेनिंग शिविर में मुफ्ती मोहम्मद शोएब, कारी वहाजुद्दीन, कारी राशिद हमीदी, अयान अली, मुफ्ती मोहम्मद कासिम, मौलाना अबरार अहमद, सईद अहमद, इरशाद अली, मोहम्मद अदनान आदि मौजूद रहे।