जिले में एंटी रेबीज इंजेक्शन का टोटा
बिजनौर। जिला अस्पताल समेत जिले के करीब करीब सभी अस्पतालों में एक सप्ताह से कुत्ते काटे के इंजेक्शनों का टोटा है। अफसरों की मानें तो जिला अस्पताल समेत पूरे जिले की सीएचसी, पीएचसी के लिए एंटी रेबीज इंजेक्शन (एआरवी) उपलब्ध कराने के लिए मुख्यालय को डिमांड भेज दी गई है।
जिले में 12 सीएचसी और 12 पीएचसी हैं। नजीबाबाद, धामपुर, चांदपुर, नगीना, जलीलपुर, स्याऊ, नहटौर, नूरपुर, स्योहारा, अफजलगढ़, कासमपुरगढ़ी, कोतवाली देहात, चंदक, मंडावर, किरतपुर, हल्दौर आदि शामिल हैं। इसके अलावा जिले में करीब 45 अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र स्थित हैं। इनमें भागूवाला, झक्काकी, मंडावली, नांगल सोती, किरतपुर क्षेत्र में भनेड़ा, गनौरा, बेगमपुरशादी, कोतवाली देहात में कोटकादर, पुरैनी, मोहम्मदपुर देवमल में स्वाहेड़ी, धर्मनगरी, बालावाली, बरुकी आदि शामिल हैं। नियमानुसार जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध होने चाहिए। जिससे पीएचसी के दायरे में आने वाले लोगों को भी यदि कोई जानवर काट ले तो उन्हें ज्यादा दूरी तय न करनी पड़े, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है।
सीएचएसी, पीएचसी को तो छोड़िए पिछले एक सप्ताह से जिला अस्पताल में भी एआरवी नहीं है। चिकित्सकों के अनुसार जिला अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 60 मरीज कुत्ते, बंदर आदि के काटे का इंजेक्शन लगवाने आते हैं, जबकि जिले की अन्य सीएचसी और पीएचसी पर ऐसे मरीजों की संख्या लगभग 150 के आसपास है। मरीजों का कहना है कि चिकित्सकों ने कुत्ते काटे के इंजेक्शन की डिमांड समय से नहीं भेजी। इससे सभी अस्पतालों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में मरीजों को मेडिकल स्टोर से खरीदकर इंजेक्शन लगवाने पड़ रहे हैं। मरीजों ने शीघ्र ही एआरवी उपलब्ध कराने की मांग की है। सीएमओ डॉ. शरद कुमार त्यागी ने बताया कि वे प्राथमिकता के आधार पर हर सीएचसी व पीएचसी पर शीघ्र ही एंटी रैबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराएंगे।
पांच इंजेक्शन लगवाने का खर्चा 1500 रुपये
बिजनौर। जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राधेश्याम वर्मा के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता काट ले तो उसे पांच इंजेक्शन का कोर्स अवश्य करना चाहिए। इससे भविष्य में रैबीज होने के चांस नहीं रहते। अन्यथा 12 साल बाद भी संबंधित व्यक्ति को यह बीमारी हो सकती है। ऐसा नहीं करने पर रोगी पागल भी हो सकता है। पहला इंजेक्शन कुत्ता काटने पर पहले दिन, दूसरा इंजेक्शन तीसरे दिन, तीसरा सातवें दिन, चौथा 14 वें दिन और पांचवां 21 वें दिन जरूर लगवाना चाहिए। आमतौर पर मरीज और चिकित्सक इसमें लापरवाही करते हैं। चिकित्सक और मरीज अधिकतम तीन इंजेक्शन में ही काम निपटा देते हैं, जबकि ऐसा करना गलत है। कुत्ते के काटने पर मरीज को पांच ही टीके लगवाने चाहिए। जिससे भविष्य में रैबीज के जोखिम से बचा जा सके। सरकारी अस्पतालों में एंटी रैबीज इंजेक्शन नहीं होने से मरीजों पर करीब 1500 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ रहा है। एआरवी की शार्टेज के चलते लोग मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदकर इंजेक्शन लगवाने को मजबूर हैं। मेडिकल स्टोरों पर इसके एक इंजेक्शन की कीमत 300 रुपये है, पांच इंजेक्शन लगवाने पर मरीज को 1500 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।