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कान्हा पशु आश्रय स्थल से गौवंश को गोद ले सकते हैं किसान

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कान्हा पशु आश्रय स्थल से गोद ले सकते हैं गोवंश
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बिजनौर। जिले में कान्हा पशु आश्रयस्थल में रखे गए गोवंश को कोई भी किसान गोद ले सकते हैं। किसान गोवंश को अपने साथ ले जा सकते हैं। इसके लिए बस आवेदक को मामूली प्रक्रिया पूरी करनी होंगी। साथ ही यह शपथ पत्र देना होगा कि वे गोवंश को हमेशा अपने साथ रखेंगे। उनकी देखभाल करेंगे और बूढ़ी होने पर भी उन्हें नहीं छोड़ेंगे। जिले के कुछ किसानों ने गोवंश को लेने के लिए आवेदन भी किया है।
गोवंश पर कटान पर रोक के बाद से किसानों ने गोवंश को जंगल में छोड़ना शुरू कर दिया था। पशुओं ने खेतों में फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू किया तो किसान परेशान हो गए। किसान संगठनों व विपक्षी पार्टियों ने इसे मुद्दा बनाना शुरू कर दिया था। इसके बाद निराश्रित पशुओं को शरण देने के लिए प्रदेश सरकार ने कान्हा पशु आश्रय स्थल बनाने की घोषणा की। शहरों में नगर पालिका व पंचायतों तथा गांवों में ब्लॉक कार्यालय द्वारा इन गोशालों का संचालन किया जा रहा है। निराश्रित मिलने वाले पशुओं को यहां रखा जा रहा है। जिले में कान्हा पशु आश्रय स्थल में अब तक 637 गोवंश आ चुके हैं। किसान चाहें तो इन गोवंश को गोद लेकर अपने साथ घर ले जा सकते हैं। इसके लिए किसानों को पशुपालन विभाग को शपथ पत्र देना होगा। शपथपत्र के साथ जमीन की फरीद व ग्राम प्रधान की संस्तुति भी देनी होगी। इन पत्रों को मिलने के बाद बीडीओ कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद किसान को गोवंश दे दी जाएगी। गोवंश किसान को देने के बाद बीचबीच में इनका सर्वे किया जाएगा। देखा जाएगा कि गोवंश किसान के पास ही है या नहीं।
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शपथपत्र देंगे किसान
किसान विभाग को शपथ पत्र में लिखकर देगा कि वह गाय को हमेशा अपने पास रखेगा। उसे किसी को देगा नहीं, बेचेगा नहीं और छोड़ेगा नहीं। गाय के चारे और पानी का हमेशा ध्यान रखेगा।

30 रुपये दैनिक आहार को
कान्हा पशु आश्रय स्थल पर एक पशु के दैनिक आहार के लिए 30 रुपये निर्धारित किए गए हैं। इसके लिए जिले को एक करोड़ का बजट मिल भी चुका है। इस बजट से ही पशुओं के आहार की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा सामाजिक संस्थाओं को भी पशुओं की सेवा से जोड़ा जाएगा।

बछड़ों को छोड़ा
जिले में निराश्रित पशुओं ने जिले में फसलों को अधिक नुकसान नहीं पहुंचाया। अधिकतर किसान अपने गोवंश को अपने पास ही रखते हैं। गोवंश में कुछ किसानों ने बछड़ों को ही छोड़ा है। इसके अलावा पहले से ही सड़कों पर निराश्रित घूमने वाले पशुओं को कान्हा आश्रय स्थल में रखा गया है।

बनाए गए आश्रय स्थल
जिले में करीब सभी नगर पालिका व पंचायतों तथा ब्लॉक द्वारा कान्हा पशु आश्रय स्थल बनाए गए हैं। यहां पर गोवंश को रखा जा रहा है। सूचना मिलने पर कर्मचारी निराश्रित गोवंश को यहां ले आते हैं।
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चार किसानों ने किया आवेदन
मुख्य पशुधन चिकित्साधिकारी डा. भूपेंद्र सिंह के अनुसार किसान कान्हा पशु आश्रय स्थल से किसान पशुओं को गोद ले सकते हैं। इसकी लिए बहुत मामूली प्रक्रिया है। जिले के चार किसानों ने गोवंश को गोद लेने के लिए आवेदन भी किया है।
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