बिजनौर। नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान के दौरान सभी की निगाह दलित वोटरों पर रही। दलितों ने सपा व भाजपा दोनों प्रत्याशियों को निराश नहीं किया। दलितों का वोट दोनों जगह बंटता दिखाई दिया। यह देख भाजपा के खेमे में बेचैनी बढ़ गई।
नूरपुर सीट पर दलित वोट निर्णायक है। दलितों को रिझाने के लिए कई दिनों से भाजपा व सपा के नेता लगे थे। गठबंधन के चलते सपा दलित वोटों को अपना मान रही थी। भाजपा भी दलित वोटों पर अपना दावा कर रही थी। मतदान के दौरान हर किसी की नजर दलित वोटो पर रही। दलितों ने सपा व भाजपा दोनों दलों में किसी को भी निराश नहीं किया। दोनों जगह दलितों के वोट जाते दिखाई दिए। शहर से लेकर देहात तक दलितों का वोट आपस में बंटता नजर आया। मतदान से पहले तक दोनों दलों के नेता दलितों को समझाते रहे पर दलितों ने किसी की नहीं सुनी। दलितों के साथ सैनी वोट आपस में बंटा दिखाई दिया। सैनी भाजपा का वोट माना जाता था। महान दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष केशव देव मौर्य की राजा के ताजपुर में हुई सपा प्रत्याशी नईमुलहसन के समर्थन में हुई सभा का असर सैनी बिरादरी के लोगों पर दिखाई दिया। सैनी सपा की ओर भी जाते दिखाई दिए। यह देखकर सब हैरत में रहे। राजा के ताजपुर क्षेत्र में कई सैनी बिरादरी के लोग सपा को वोट डालने का दावा करते रहे। जाटों को वोट भी बंटा रहा पर ज्यादातर जाट भाजपा को वोट देते नजर आए।