बिजनौर/मंडावर/बेगावाला। जलस्तर कम होने के बावजूद गंगा क्षेत्र में जमकर कटान कर रही है। रविवार की रात गंगा ने उत्तराखंड की ओर बने तटबंध को 800 मीटर तक काट दिया है। इससे क्षेत्र में बाढ़ आने की आशंका और गहरी होती जा रही है। किसानों की नींद उड़ी हुई है। तटबंध कटने से अधिकारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है। उत्तराखंड के अधिकारियों ने तटबंध की मरम्मत के लिए मौके पर डेरा डाल दिया है। बिजनौर के अधिकारी भी पहुंच गए हैं। भाकियू ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया तो खेतों में नुकसान देखकर दंग रह गए। खेतों से गन्ने की फसल कटकर गंगा में समा चुकी है। गन्ने, गेहूं की फसल बर्बाद हो चुकी है।
उत्तराखंड की ओर कटान को रोकने के लिए बनाए गए तटबंध को शनिवार रात गंगा ने कुछ मीटर तक काट दिया था। इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया था। उत्तराखंड के दो दर्जन से अधिक गांवों के अलावा जिले के दो गांव रामसहायवाला और हिम्मतपुर बेला भी इसी तटबंध के जरिए कटान और बाढ़ से बचे हुए हैं। तटबंध की मरम्मत का काम रविवार को ही शुरू हो गया था। मगर, रविवार की रात गंगा की लहरों से तटबंध करीब 800 मीटर तक कट गया है। पानी भी खेतों की ओर रिसता जा रहा है। यह दरार कभी भी बड़ा रूप ले सकती है। गांव वालों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने के बाद जब गंगा में पानी कम होता तो है तो उसकी धारा बहुत तेज हो जाती है। जलस्तर बढ़ने पर कटान नहीं होता, लेकिन कम होने पर तेज धारा जमकर कटान करती है। मजदूरों ने तटबंध की मरम्मत के लिए पत्थरों को बांधने के लिए लोहे का जाल बनाना शुरू कर दिया है। वहीं, गांव ब्रह्मपुरी में घुसा गंगा का पानी रविवार की रात को उतर गया। पानी उतरने से गांव वालों ने राहत की सांस ली है।
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह ने किसानों के साथ रायपुर सादात क्षेत्र के गांव नरौल्लापुर का दौरा किया। वहां खो नदी ने खेतों में फसलों को बर्बाद कर दिया है। खेतों मेें नदी के पानी के साथ आई रेत में धान और गन्ने की फसल दबकर गलने लगी है। किसानों के सामने पशुओं के चारे तक का संकट आ गया है। गांव वालों ने जिला प्रशासन से मुआवजे, पशुओं के चारा और कीटनाशक दवाइयों के छिड़काव की मांग की है। दिगंबर सिंह ने कहा कि अगर किसानों की अनदेखी की गई तो जिला प्रशासन को सबक सिखाया जाएगा। इस दौरान संदीप त्यागी, इनामुल्ला खां, वीर सिंह, दिनेश कुमार, समरपाल सिंह, एहसान अंसारी, नितिन कुमार कुमार आदि मौजूद रहे।