चीनी मिलों ने किसानों को किया अब तक 1200 करोड़ रुपये का भुगतान
बिजनौर। चुनावी सीजन में वर्तमान पेराई सत्र में जिले की चीनी मिलों ने चुनावी सीजन में हर रोज करीब दस करोड़ का भुगतान किसानों को किया। इसके अलावा पिछले सीजन का भी करीब 380 करोड़ किसानों के खाते में गया है। किसानों को भुगतान समय देने के लिए अब भी मिलों पर सख्ती की जा रही है।
खेती बिजनौर जिले की लाइफ लाइन है और गन्ना जिले की प्रमुख फसल है। जिले की खेती योग्य जमीन के आधे हिस्से करीब सवा दो लाख हेक्टेयर जमीन में गन्ना बोया जाता है। साढ़े तीन लाख किसान गन्ने की खेती से जुड़े हैं। गन्ने का भुगतान जिले के चुनावी मुद्दों में सबसे बड़ा मुद्दा रहता है। वर्तमान पेराई सत्र में प्रदेश सरकार ने गन्ने के दाम नहीं बढ़ाए थे। इसके लिए चीनी व्यापार से मिलों को हो रहे नुकसान का हवाला दया गया था। इसको लेकर किसानों में नाराजगी भी देखी गई थी। किसानों की नाराजगी को दूर करने के लिए गन्ना भुगतान को हथियार बनाया गया है। अगर चीनी के दाम कम हों तो चीनी मिल भुगतान करने में आनाकानी करती हैं। लेकिन चुनावी सीजन में गन्ना बकाया भुगतान कराने पर खास जोर दिया गया है। जिले की नौ चीनी मिलों में सबसे पहले बिलाई चीनी मिल ने एक नवंबर को गन्ना पेराई शुरू की थी। वेव ग्रुप की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिल दिसंबर में चली थीं। गन्ना विभाग को किसानों ने 11 मार्च तक 1861 करोड़ का गन्ना बेचा है। इसमें अब तक 1209 करोड़ का भुगतान किसानों को मिल चुका है। किसानों के खाते में वर्तमान पेराई सत्र का करीब दस करोड़ का भुगतान रोज भेजा गया है। साथ ही पिछले साल का रुका मोटा भुगतान भी दिलाया गया है।
चीनी मिल भुगतान बकाया
धामपुर 339 51
स्योहारा 251 70
बिलाई 32 235
बहादरपुर 182 22
बरकातपुर 106 109
बुंदकी 186 13
चांदपुर 22 79
बिजनौर 15 49
नजीबाबाद 71 20
कुल 1209 652
नोट:ये आंकड़े गन्ना विभाग से लिए गए हैं।
पिछले साल का भी 400 करोड़ का भुगतान मिला
पिछले साल का भी करीब 400 करोड़ का भुगतान मिलों ने किया है। करीब 300 करोड़ का भुगतान मिलों ने शासन से मिले सॉफ्ट लोन से किया है। दिसंबर में शासन द्वारा बरकातपुर चीनी मिल को 44.73 करोड़, स्योहारा को 98.55 करोड़, धामपुर को 65.35 करोड़, बुंदकी को 48.28, बहादरपुर को 39.66 करोड़ का सॉफ्ट लोन दिया गया है। इससे गन्ना किसानों को शत प्रतिशत भुगतान किया गया। इसके अलावा बिलाई मिल ने करीब 62 करोड़, चांदपुर व बिजनौर मिल ने करीब 25 करोड़ का भुगतान किया है।
नहीं दिया सॉफ्ट लोन
प्रदेश में भाजपा की सरकार आते ही बसपा सरकार में वेव ग्रुप को बिकीं सरकारी क्षेत्र की बिजनौर व चांदपुर चीनी मिलों के खिलाफ सीबीआई जांच बैठाई गई। मिल ने शासन पर दबाव बनाने के लिए किसानों का भुगतान रोक दिया, लेकिन इसके बाद भी शासन ने ग्रुप को सॉफ्ट लोन नहीं दिया। वेव ग्रुप ने बैकफुट पर आते हुए अपने स्तर से ही किसानों को भुगतान किया है।