अमरोहा। 52 दिन के भीतर पांच करोड़ की नॉट फार सेल और नकली दवा पकड़ में आने के बाद औषधि विभाग में हड़कंप मचा है। अब मेडिकल स्टोरों पर मिलने वाली दवाओं का बिल नहीं दिखाने पर दवा नकली मानी जाएगी। संचालक पर नकली दवा बेचने संबंधित रिपोर्ट दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। औषधि विभाग ने इसको लेकर शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी। मेडिकल संचालकों को नोटिस जारी करने की कवायद शुरू कर दी गई है।
पुलिस व औषधि विभाग की टीम ने 27 मार्च को हसनपुर में साढ़े तीन करोड़ रुपये की नब्बे बोरा नकली दवा पकड़कर चार धंधेबाजों को जेल भेजा है। इससे पहले नॉट फार सेल की दवा पकड़ी गई थी। सूबे में फैले नकली और नाट फार सेल दवा के अवैध धंधे से शासन स्तर पर खलबली मची हुई है। सख्त निर्देशों के बाद विभागीय टीम ने अलीगढ़, बुलंदशहर समेत कई जिलों में ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। औषधि विभाग की जांच पड़ताल में दवा तस्करों के तार रसूखदारों से जुड़े मिले।
शिकंदराबाद, अलीगढ़ और रुड़की में नकली दवा तैयार होने का खुलासा हुआ था। औषधि विभाग की अब तक की जांच पड़ताल में नकली और नॉट फार सेल दवा का एक ही गिरोह है। जिसका जाल वेस्ट यूपी के अलावा दिल्ली और उत्तराखंड में फैला हुआ है। मुरादाबाद औषधि निरीक्षक नीरज मोहन दीपक के मुताबिक सूबे में नकली दवा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए औषधि विभाग ने मेडिकल स्टोर संचालक को बिना बिल के दवा बेचता पाया गया तो उसकी दवा नकली मानी जाएगी। इतना ही नहीं नकली दवा बेचने संबंधित धाराओं में रिपोर्ट कराकर कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, विभागीय टीम गोपनीय तरीके से छापेमारी कर रही है। जल्द की कुछ और तस्कर हत्थे चढ़ सकते हैं।