अमरोहा। विधानसभा के सामने किसानों ने आलू फेंका तो सरकार को आलू नीति बनानी पड़ी। लखनऊ ही नहीं अपने जनपद में भी आलू सड़कों पर फेंक दिया गया था। आलू नीति तो बनी लेकिन, आलू की खरीद नहीं हो पाई। अपने जिले में एक केंद्र खुला, वो भी बाजार में आलू बिकने के बाद।
सरकार ने एक मार्च से 30 अप्रैल तक आलू खरीद करने की योजना बनाई। आलू खरीद का जिम्मा यूपी एग्रो को दिया गया। यूपी एग्रों को केंद्र बनाकर 549 रुपये की दर से आलू की खरीद करनी थी। उधर जनवरी में आलू की खुदाई शुरू हो जाती है। फरवरी के महीने में अधिकांश किसान आलू खोद लेते हैं। सरकार की नीति में यहीं झोल दिखाई देने लगा।
गौरतलब है कि जब आलू जनवरी में खुदने लगता है तो फिर मार्च से खरीद करने का तर्क किसानों के गले नहीं उतरा। किसानों ने सरकार पर एतबार नहीं किया और बाजार में आलू पहुंचा दिया। मंदी के डर और आलू खरीद नीति पर विश्वास नहीं होने के चलते बाजार में सस्ते दामों पर आलू बेच दिया। अचानक बाजार में आलू आने से रेट गिर गए। मार्च में कुछ ही किसान आलू की खुदाई करते हैं।
अपने जिले में आलू खरीद के लिए धनौरा में केंद्र बनाया गया है। करीब बीस दिन पहले यह सेंटर चालू किया गया लेकिन, एक किलों आलू भी यहां नहीं पहुंच रहा है। मौजूदा रेट 800 रुपये प्रति क्विंटल के करीब है। बाजार का यह रेट कुछ ही किसानों के लिए लाभकारी हुआ। बाकी तो सस्ते दाम में जनवरी और फरवरी में आलू बेच चुके हैं।
पिछले साल जिले में आलू का रकबा 2800 हेक्टेयर था। आलू की मंदी को भांपते हुए किसानों ने इस बार आलू कम बोया। मौजूदा साल में केवल 2400 हेक्टेयर जमीन में ही आलू बोया गया था। वहीं इस बार किसानों ने कोल्ड स्टोर में भी आलू रखने से परहेज किया है। जिले के 18 कोल्ड स्टोर में केवल तीस प्रतिशत आलू ही रखा गया है। किसानों ने कोल्ड स्टोर में रखने के बजाए सीधे बाजार का रुख कर लिया।
- जनवरी में आलू की खुदाई होनी शुरू हो गई थी। सरकार ने आलू खरीद का जिम्मा यूपी एग्रो को दिया था। हमने खरीद केंद्र खोलने के लिए यूपी एग्रो को कई बार पत्र लिखे लेकिन, समय से खरीद केंद्र नहीं खुल पाया।
- नत्थू लाल गंगवार, जिला उद्यान अधिकारी।
- एक मार्च से तीस अप्रैल तक आलू खरीदा जाना था। जिसके लिए करीब बीस दिन पहले धनौरा में केंद्र खोल दिया गया है। अब बाजार में रेट ज्यादा होने के कारण आलू नहीं मिल रहा है।
- उदयवीर सिंह, प्रभारी जिला प्रबंधक यूपी एग्रो।