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सोलर सिस्टम लगाएं, विद्युत निगम को बेचें बिजली

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सोलर सिस्टम लगाएं, विद्युत निगम को बेचें बिजली
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बिजनौर। अब उपभोक्ता विद्युत निगम के केवल ग्राहक बनकर ही नहीं रहेंगे। वे विद्युत निगम के साथ व्यवसाय भी कर सकते हैं। दूसरों को बिजली देने वाले विद्युत निगम को उपभोक्ता घर की छत से सोलर पैनल से बिजली बनाकर बेच सकते हैं। इसके लिए सोलर सिस्टम की कंपनियों ने उपभोक्ताओं को लुभाना शुरू कर दिया है। मकानों की छतों पर सोलर सिस्टम लगने भी शुरू हो गए हैं। शहर के एक स्कूल ने तो विद्युत निगम को बिजली बेचनी शुरू भी कर दी है।
सूर्य की ऊर्जा कभी कम नहीं होती है। इसलिए इसे अक्षय ऊर्जा भी कहा जाता है। आज भी सभी घरों में 24 घंटे बिजली देना विद्युत निगम का एक सपना ही है। विद्युत निगम डिमांड के बराबर बिजली नहीं दे पाता है। सूरज के रेडिएशन से बनने वाली सोलर एनर्जी को इसके विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है। पहले केवल ऐसे गांवों में ही सोलर पैनल दिखाई देते थे जहां पर बिजली नहीं थी। लेकिन अब शहरों में भी सोलर पैनल लगे देखे जा सकते हैं। विद्युत निगम के ऊपर निर्भरता कम करने के लिए अब सोलर कंपनी नई स्कीम लेकर आई हैं। उपभोक्ता अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगा सकते हैं। क्षमता के अनुसार जितनी चाहें बिजली उपभोक्ता अपने घर में खर्च कर सकते हैं। बची बिजली को विद्युत निगम को बेच सकते हैं। बेची गई बिजली पर उपभोक्ताओं को 3.5 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से भुगतान मिलेगा। जिलेवासी भी सोलर पैनल के लिए जागरूक हो रहे हैं। गांवों और शहरों दोनों जगह पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं। शहर का डीडीपीएस स्कूल विद्युत निगम को बिजली बेच रहा है।
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योजना पर ऐसे होगा काम
एक किलोवाट यूनिट बैटरी वाले सोलर सिस्टम की कीमत 65 हजार रुपये है। वाट बढ़ने पर कीमत बढ़ती जाएगी। इस कीमत में कंपनी मकान की छत पर पैनल लगाने से लेकर सारा काम पूरा करके देगी। उपभोक्ता को पैसे देने के बाद फिटिंग आदि का कोई काम नहीं करना है। एक परिवार एक माह में आराम से 300 से 350 यूनिट तक खर्च करता है। एक किलोवाट के सोलर सिस्टम से करीब दस यूनिट एक दिन में आराम से बनाई जा सकती हैं। बची यूनिट को बेचा जा सकता है। निगम को बेची यूनिट का पता लगाने के लिए उपभोक्ता के घर पर मीटर लगाया जाता है।

ये हैं बिजली के दाम
एक यूनिट बिजली की कीमत तीन रुपये से साढ़े छह रुपये प्रति यूनिट तक है। कामर्शियल रेट इससे भी ज्यादा हैं। एक सामान्य परिवार का बिजली बिल एक हजार से 1200 रुपये प्रति महीना तक आता है। अगर उपभोक्ता अपने घर पर सोलर सिस्टम लगाए तो वह 3.5 रुपये प्रति यूनिट की दर से विद्युत निगम को बिजली बेच सकता है।

रेडिएशन से होते हैं चार्ज
सोलर सिस्टम में भी अब पहले से बदलाव किया गया है। पहले सोलर सिस्टम केवल धूप से चार्ज होते थे। लेकिन अब सोलर पैनल सूरज के रेडिएशन से चार्ज होते हैं। धूप निकले या न निकले, सोलर पैनल को चार्ज होने में कोई परेशानी नहीं होती है।

40 साल नहीं आएगा बिजली का बिल
सोलर पैनल की गारंटी 40 साल है। यानि पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं को 40 साल तक बिजली के बिल से मुक्ति मिल जाएगी। इसके अलावा उन्हें आमदनी भी होगी। सोलर को सरकार अनेक योजनाओं से जोड़ रही है। कुछ विभाग तो पानी की टंकी को भरने के लिए मोटर पर भी सोलर पैनल लगा रहे हैं। इस योजना को पनघट परियोजना नाम दिया गया है। सिटीजन पावर कंपनी के यूपी व उत्तराखंड स्टेट हैड जावेद सिद्दीकी के अनुसार उपभोक्ता घरों पर पैनल लगवाने को जागरूक हो रहे हैं। बिजनौर में भी कई उपभोक्ताओं ने घरों पर सोलर पैनल लगवाए हैं।

शहर में यहां लगे हैं सोलर पैनल
धामपुर में एक मस्जिद में पांच किलो वाट, एक किसान के नलकूप पर पांच किलोवाट, कस्बा झालू में चाणक्य इंस्टीट्यूट पर पांच किलोवाट, अफजलगढ़ में एक स्कूल पर 15 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगाया गया है। ये सिस्टम 50 से 150 यूनिट बिजली प्रतिदिन पैदा कर रहे हैं। चाणक्य कोचिंग सेंटर पर बिजली कनेक्शन ही नहीं है। केवल सोलर एनर्जी से ही सिस्टम चलते हैं। सोलर के साथ बैटरे लगवाने पर प्रति किलो वाट चार्ज 65 हजार, बिना बैटरे के 50 हजार रुपये है। सोलर पैनल लगवाने वाले किसी उपभोक्ता ने फिलहाल निगम को बिजली बेचनी शुरू नहीं की है। इसके अलावा पहले से ही विवेक कॉलेज, माउंट लिट्रा जी स्कूल व कृष्णा कॉलेज में सोलर पैनल लगा है। नजीबाबाद रोड स्थित श्री हॉस्पिटल में 25 किलोवाट के दो सोलर पैनल, विवेक कॉलेज में 20 किलोवाट का एक सोलर पैनल लगा है।
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---------- कोट
डीडीपीएस बेच रहा बिजली : एसडीओ
बिजनौर। विद्युत निगम के एसडीओ राहुल गौतम के अनुसार जिले के उपभोक्ता सोलर पैनल लगवा रहे हैं। उनकी अतिरिक्त बिजली को विद्युत निगम खरीद सकता है। बिजनौर का डीडीपीएस स्कूल निगम को बिजली बेच भी रहा है।
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