टीबी मरीजों की सूचना न देने वाले चिकित्सकों को होगी जेल
बिजनौर। टीबी रोगियों की सूचना नहीं देने वाले चिकित्सकों को जेल होगी। सरकार इसके प्रति गंभीर हो गई है। केंद्र सरकार ने ऐसा नियम लागू किया है कि जो भी चिकित्सक टीबी रोगी की सूचना जिला टीबी अस्पताल को नहीं देगा उसको दो साल तक की जेल हो सकती है।
सरकार टीबी को खत्म करने के लिए सिर से लेकर चोटी तक का जोर लगा रही है। इसके लिए सरकार तरह-तरह की योजनाएं चलाकर रोगियों को मुफ्त में इलाज कराने के लिए प्रेरित कर रही है। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2025 तक टीबी फ्री इंडिया घोषित कर दिया जाए। सरकार इसमें देशभर के सरकारी और प्राइवेट सभी चिकित्सकों का सहयोग चाहती है। जिला टीबी अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार जिले के प्राइवेट चिकित्सक इसमें कोई खास रुचि नहीं ले रहे हैं, जो बेहद ही चिंता का विषय है। अफसरों के मुताबिक जिले भर में करीब 250 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पतालों में चल रहा है, जबकि मरीजों की संख्या इसके कम से कम दो गुनी होगी। कुछ मरीज अपना प्राइवेट डाक्टरों या फिर सीधे केमिस्ट से दवा ले रहे हैं। इस कारण रिकार्ड स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंच पा रहा है। शासन ने टीबी की दवा बेचने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों को इसका आंकड़ा रखने के दिशा निर्देश दिए हैं। उन्हें रजिस्टर में चढ़ाकर स्वास्थ्य विभाग को सूचना देने के सख्त निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद इसके अब तक न के बराबर ही दवा विक्रेताओं ने स्वास्थ्य विभाग को सूचना उपलब्ध कराई है। इसी को ध्यान में रखते हुए शासन ने आदेश जारी किए हैं कि टीबी मरीजों की सूचना न देने वाले चिकित्सकों को दो साल तक की सजा होगी। अगर प्राइवेट चिकित्सक क्षय पोर्टल पर पंजीकरण नहीं कराते हैं तो सीएमओ कार्यालय से हर साल होने वाला नवीनीकरण रोक दिया जाएगा।
टीबी रोगियों की सूचना स्वास्थ्य विभाग को नहीं देना गंभीर माना गया है। ऐसा होने पर किसी भी क्लीनिकल संस्था, फार्मेसी, केमिस्ट, दवा विक्रेता के खिलाफ आइपीसी की धारा 269 और 270 के तहत रिपोर्ट दर्ज कराई जा सकती है।
जिला क्षय रोग अधिकारी
सरकार चाहती है कि टीबी खत्म हो तो आईएमए सरकार के साथ है। जेल का प्रावधान सरकार ने सख्ती के लिए किया है। लेकिन बिना किसी दबाव और कार्रवाई के सभी चिकित्सकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए जिला क्षय रोग अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से सूचना देनी चाहिए।