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बिजनौर की कला प्रतिभाओं को निखार रहे हैं वाई के सिंहा

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कला प्रतिभाओं को निखार रहे वाई के सिन्हा
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बिजनौर। प्रसिद्घ चित्रकार वाईके सिन्हा (योगेंद्र कुमार सिन्हा) पूरे हिंदुस्तान में चित्रकला प्रतिभा का लोहा मनवा चुके हैं। अब वे बिजनौर की कला प्रतिभाओं को निखारने में लगे हैं। बीस साल तक बिरला ग्रुप आफ टेक्सटाइल में चीफ डिजाइनर रहे सिन्हा के चित्र बिरला ग्रुप के दुनियाभर में बने आफिसों की शोभा बढ़ा रहे हैं। ग्वालियर के सूर्य मंदिर के द्वार और लगभग 450 मूर्तियों का भी डिजाइन वे कर चुके हैं। उनका कहना है कि आज चित्रकला में समर्पित व्यक्ति के लिए बहुत पैसा और अवसर हैं।
मूल रूप से हरदोई के विलग्राम के रहने वाले सिन्हा का जन्म 25 जुलाई 1942 को हुआ। इनके पिता केपी सिन्हा बिजनौर जिला पंचायत में अकाउंटेंट थे। परिवार के साथ वे दो-ढाई साल की उम्र में बिजनौर आए थे। राजकीय इंटर कॉलेज बिजनौर से उन्होंने इंटर की परीक्षा उत्तीर्ण की। लखनऊ आर्ट कॉलेज से डिजाइन रिसर्च का एक साल का डिप्लोमा किया। इसके बाद उनका शांति निकेतन फाइन आर्ट के चार साल के कोर्स के लिए चयन हो गया। कोर्स पूरा ही किया था कि बिरला इंडस्ट्रीज आफ टैक्सटाइल में चीफ डिजाइनर बन गए। कंपनी ने उन्हें एडवांस स्टडी के लिए ब्रिटेन (यूनाइटेड किंगडम) भेजा।
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बिरला ग्रुप में बीस साल के कार्यकाल के संबंध में वे बताते हैं कि ग्वालियर के सूर्य मंदिर के मुख्य आर्किटेक्ट सीबी सोमपुरा थे और वे मुख्य डिजाइनर। उन्होंने मुख्य द्वार समेत यहां बने तीन छोटे मंदिर के डिजाइन बनाए। 450 से ज्यादा प्रतिमाओं के चित्र तैयार किए। 1990 में वे सेवानिवृत्त हुए और ईस्ट इंडिया काटन मिल फरीदाबाद व कमला सिंटेक्स फरीदाबाद में तीन-तीन साल मैनेजर डिजाइन पद पर रहे। इसके बाद गुरु नानकदेव यूनिवर्सिटी पंजाब के एपीजे कॉलेज ऑफ फाइन आर्ट जालंधर में छह साल तक एचओडी रहे। एसके मादी कॉलेज आफ फाइन आर्ट मोदीनगर में तीन साल काम किया। 2006 में वे बिजनौर लौट आए। तब से यहीं कला साधना में लगे हैं। वे इन दिनों सिलेबस से बाहर कुछ अलग सीखने के इच्छुक युवक-युवतियों को गाइड कर रहे हैं।

चमड़े पर पेंटिंग के हैं विशेषज्ञ
चमड़े पर पेंटिग करने की कला के सिन्हा विशेषज्ञ हैं। वे इस कला को युवाओं को सिखाना चाहते हैं। वे बताते हैं कि शांति निकेतन में अध्ययन के दौरान जाने-माने चित्रकार नंडियल बोस की बेटी गौरी से उन्होंने यह कला सीखी। जिले में कार्यरत देश के जाने-माने चित्रकार संजय साहनी कहते हैं कि चमड़े पर चित्र बनाने वाले आज शायद शांति निकेतन में भी नहीं होंगे। सिन्हा शायद देश के अकेले इस कला के जानकार हैं। वे जनपद के चित्रकारों के लिए उनकी कार्यशाला कराने के प्रयास में हैं। सिन्हा बताते हैं रविंद्र नाथ टैगौर जावा सुमात्रा से कपड़ों पर पेंटिग की कला की जानकारी करके आए और शांति निकेतन में इसे सिखाने की व्यवस्था की। कपड़ों पर आज यह चित्रकारी आम है।
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बच्चन की कविताओं के साथ छपे चित्र
सिन्हा बताते हैं कि हिदुस्तान साप्ताहिक में हरिवंश राय बच्चन की दो कविताएं छपनी थीं। एक पेज पर कविताएं और दूसरे पर शांति निकेतन की पृष्ठभूमि पर पेंटिंग छपनी थी। हिंदुस्तान साप्ताहिक के संपादक ने उनसे पेंटिंग बनाने को कहा। उनकी शांति निकेतन की दो पेंटिंग बच्चन जी की कविताओं के सामने के पेज पर 23 जुलाई 1967 के अंक में छपीं। सिन्हा कहते हैं कि आज चित्रकारों के लिए व्यापक अवसर हैं। नए भवन, कांप्लेक्स, होटल आदि के लिए चित्रकार चाहिएं। उत्पादों के लिए डिजाइनर की मांग है। कपडों के डिजाइनर, सिनेेमा और फिल्म में कलर संयोजन, सिरामिक्स और टाइल्य के लिए डिजाइनरों की जरूरत है।
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