फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विश्व जनसंख्या दिवस पर विशेष

विज्ञापन
विज्ञापन
घट रही नसबंदी, बढ़ रही जनसंख्या
विज्ञापन

बिजनौर। जिले में परिवार नियोजन योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। लोग नसबंदी कराने में रुचि नहीं ले रहे हैं। इसी कारण जिले की जनसंख्या लगातार बढ़ती जा रही है और नसबंदी के केस घट रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में प्रजनन दर 3.2 प्रतिशत है।
आज विश्व जनसंख्या दिवस है। प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य अत्यधिक तेज गति से बढ़ती जनसंख्या के प्रति लोगों को जागरूक करना है। यह दिवस पहली बार आज ही के दिन सन 1978 में मनाया गया। इसी दिन विश्व की जनसंख्या पांच अरब को पार कर गई थी। इसे देखते हुए संयुक्त राष्ट्र ने जनसंख्या वृद्धि को लेकर दुनियाभर में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिवस मनाने का निर्णय लिया। वर्तमान में भारत जनसंख्या वृद्धि के मामले में विश्व में दूसरे नंबर पर है। भारत में बढ़ती जनसंख्या की वजह से देश को लगातार बेरोजगारी, गरीबी, भुखमरी आदि की समस्या बढ़ रही है। एक अनुमान के अनुसार भारत में एक मिनट में लगभग 25 बच्चे जन्म लेते हैं। भारत सरकार परिवार नियोजन के लिए कई कार्यक्रम चला रही है, लेकिन लोग न के बराबर इसका लाभ ले रहे हैं।
विज्ञापन


जनपद की आबादी बढ़ रही है हर साल एक लाख
वर्तमान में जिले की कुल जनसंख्या 42 लाख है, जबकि वर्ष 2011 में करीब 36 लाख के आसपास था।
इस हिसाब से जनपद की आबादी हर साल करीब एक लाख की वृद्धि कर रही है।
हम दो हमारे दो का नारा सिर्फ कागजों में ही दौड़ रहा है। शासन की ओर से जनसंख्या नियंत्रण के लिए परिवार नियोजन के अनेक कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इनमें नसबंदी, निरोध, कॉपरटी, मालाएं आदि शामिल हैं। इसके बावजूद जिले के लोग इनका ठीक प्रकार से उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पुरुष नसंबदी से परहेज कर रहे हैं, जबकि महिलाएं इसमें काफी रुचि ले रही हैं। जिले में नसबंदी करने वाले तीन सर्जन हैं। सीएमओ राकेश कुमार मित्तल का कहना है कि नसबंदी में महिलाओं तो जागरूकता दिखा रही हैं, लेकिन पुरुष इसमें कम दिलचस्पी ले रहे हैं। 11 जुलाई से अभियान चलाकर लोगों को परिवार नियोजन के बारे में जागरूक किया जाएगा।
विज्ञापन

महिला एवं पुरुष को मिलते हैं तीन हजार रुपये
प्रसव के एक सप्ताह के भीतर नसबंदी कराने पर महिला को तीन हजार रुपये मिलते हैं, जबकि सामान्य स्थिति में नसबंदी कराने पर दो हजार रुपये का लाभ दिया जाता है। यदि कोई पुरुष नसबंदी कराता है तो शासन की ओर से उसे तीन हजार रुपए का लाभ मिलता है।
वर्ष पुरुष महिला कुल
2013-14 31 982 1013
2014-15 15 876 0896
2015-16 12 1578 1600
2016-17 06 660 0666
2017-18 15 578 0593
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें