अमरोहा। एक ही सप्ताह में सौ से ज्यादा बंदरों की मौत होने से डाक्टर भी हैरान हैं। पशु चिकित्सक गांव में डेरा डाले हुए हैं। लेकिन, मौत का कारण साफ नहीं हो सका। फिलहाल बंदरों की मौत का राज जानने के लिए आइवीआरआई के वैज्ञानिकों की टीम लगी हुई है। गुरुवार को भी पूरा दिन विसरे को लैब में परखते रहे।
ढबारसी में बंदरों की मौत के बाद मंगलवार को एक बंदर का पोस्टमार्टम किया गया था। जिसमें मौत की कोई खास वजह सामने नहीं आ सकी। यहां के पशु चिकित्सकों ने सिर्फ इतना समझा कि उनके लीवर और फेफड़े खराब मिले हैं। इसके साथ ही मरे हुए बंदरों का पेट खाली मिला। जिसके आधार पर खूनी दस्त से बंदरों की मौत होना बताया जा रहा है। ग्रामीणों के अपने अलग-अलग तर्क हैं। कुछ लोग बंदरों को जहर दिए जाने की बात भी कह रहे हैं तो कुछ बीमारी की चपेट में आने से बंदरों की मौत होना बता रहे हैं।
इन सब बातों को देखते हुए पशु चिकित्सकों ने विसरा सुरक्षित कर आईवीआरआई बरेली भिजवा दिया। वहीं, वन विभाग ने बिना पोस्टमार्टम कराए एक मरे हुए बंदर को भी भिजवाया। जिससे बंदरों की मौत के हर पहलू को परखा जा सके। उधर, बरेली में बुधवार को दोपहर बाद विसरा पहुंचा। आइवीआरआई ने सौ से अधिक बंदरो की मौत की सूचना मिलते ही अपने यहां की छुट्टी को रद्द कर दिया। निदेशक ने अमरोहा के मुख्य पशुु चिकित्साधिकारी और डीएफओ से इस संबंध में बात की। निदेशक ने बुधवार की शाम ही विसरे की जांच के लिए वैज्ञानिकों की टीम को लगा दिया। फिलहाल गुरुवार को भी जांच जारी थी।
अमरोहा से आए मरे हुए बंदर और विसरा की जांच चल रही है। जब तक मौत की वजह स्प्ष्ट नहीं हो जाती। लैब में परीक्षण चलता रहेगा। उम्मीद है एक या दो दिन में रिजल्ट आ जाएगा।
-डा. एके शर्मा, निदेशक आईवीआरआई,