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तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे ....

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रस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे...
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हजरत शेख दाऊद के मजार पर उर्स की चौथे दिन आल इंडिया मुशायरा का आयोजन
-फोटो 13 से 19 तक
अमर उजाला ब्यूरो
उझारी।
हजरत शेख दाऊद के मजार पर उर्स की चौथे दिन आल इंडिया मुशायरा का आयोजन किया गया। मुशायरे में दूर शहरों से आए शायरों ने अपने कलाम पेश कर समां बांध दिया। एक के बाद एक शायरों की शायरी सुन कर लोग वाहवाह ही कहते नजर आए।
पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने शमां रोशन की। पहले दौर का मुशायरा नातिया मुशायरा था। जिसमें वारिस वारसी ने नाते मोहम्मद पढ़ते हुए कहा और शतक फरिश्ते भी झूम उठते हैं वारिस- नाते मुस्तफा मैंने जब भी गुनगुन आई है सुना कर वाहवाही लूटी। शाइस्ता सना ने अपने अंदाज में कुछ इस तरह से शेर पढ़ा एक अनमोल निशानी की तरह रखा है तेरा गम आंख में पानी की तरह रखा है। रोशन निजामी ने जुल्म पर जुल्म मेरे यार तू सहता क्यों है-इतना बुजदिल है तो इस मुल्क में रहता क्यों है। अली बाराबंकी ने लिखा खुमार लिखा जाम लिख दिया-एक दिल बचा था वह भी तेरे नाम लिख दिया। हाशिम फिरोजाबादी ने ए खाक ए वतन तेरे निगहबान बहुत हैं-भारत की हिफाजत को मुसलमान बहुत हैं सुना कर तालियां बटोरीं। खुर्शीद हैदर मुजफ्फरनगर कहते हैं कहीं ऐसा न हो कोई बगावत पर उतर आए-किसी से बेरुखी हद के सिवा अच्छी नहीं लगती। सबा बलरामपुरी ने अपने अंदाज में कुछ इस तरह से शेर पढ़ा रुसवाइयों से खुद को बचाती रही हूं मैं-लिख लिख कर तेरा नाम मिटाती रही हूं मैं। इंतखाब संभली ने भी मैं अपना सर झुकाऊं क्यों किसी सरकार के आगे-हर एक सरकार झुकाती है मेरे सरकार के आगे। मुशायरे को आगे बढ़ाते हुए मोहन मुंतजिर ने तरस जाओगे जन्नत को अगर मां-बाप रोएंगे-किसी लड़की की खातिर भूलकर भी जान मत देना आदि अपने कलाम सुनाए। इसी क्रम में देवबंदी से तशरीफ़ लाए डा. माजिद देवबंदी, हामिद भुसावली, मालेगांव महाराष्ट्र से अल्ताफ जिया, वारिस वारसी आदि शायरों ने शायरी पेश की। शायर सज्जाद झंझट और कवि अब्बा बूढ़ा पुरी ने हास्य व्यंग सुना कर खूब गुदगुदाया। मुशायरे की सदारत हसनपुर के पूर्व चेयरमैन अलीमुद्दीन सैफी ने और संचालन महेंद्र सिंह अश्क ने किया।
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इस अवसर पर चौधरी बब्बी, अब्दुल कादिर, हाजी जुल्फकार, चौधरी मुशाहिद, अलाउद्दीन सैफी, सज्जन चौधरी, जफर सलमानी, आरिफ धूमा, चमन देश लान, नदीम मुशाहिद, नियाज रिफ, चमन सैफी, वसीम सलमान, रईस अहमद, अतहर एहसान, इरफान हैदर, जावेद अली, शाह नसीम शेख आदि रहे।
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