‘गलती मानने से अच्छा है पश्चाताप करना’
स्योहारा। गांव आलमपुरी में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत ज्ञान सप्ताह यज्ञ के चौथे दिन धर्म की परिभाषा बताते हुए पाप और पश्चाताप की विस्तार से व्याख्या की गई। विधायक स्व. लोकेंद्र सिंह चौहान के निवास पर उनकी प्रथम पुण्यतिथि पर कथावाचक पंडित व्योम त्रिपाठी ने कहा कि वेदों द्वारा बताए मार्ग का अनुसरण करना ही धर्म है। गलती को सुधरना ही पश्चाताप है। भक्ति के माध्यम से पश्चाताप करने से सारे पाप जल जाते हैं। जबकि जाने अनजाने हमसे पाप होते रहते हैं, अपने पाप का घड़ा भर जाने पर वही यमराज बनकर सामने आते हैं।
कहा कि हम जो खाद्य पदार्थ खाते हैं उस में भी सैकड़ों प्रकार के छोटे जीव होते हैं, पृथ्वी पर चलते हैं तो हमारे पैरों से भी अनेक जीवों की मृत्यु हो जाती है। हम इन जीवों को साधारण आंखों से नहीं देख सकते। उन्होंने कहा कि गंगा में नहाने से हमारे पाप नहीं धुलते बल्कि पश्चाताप करने से ही पापों का नाश होता है। कन्नौज के ब्राह्मण अजामिल की कथा सुनाई। कहा कि सबरी ने दस हजार वर्ष तक तपस्या की थी तब उसे भगवान श्री राम के दर्शन हुए। सभी को अपना एक गुरु बनाना चाहिए। गुरु के बिना कोई ज्ञान नहीं हो सकता। हनुमान जी को उन्होंने सबसे बड़ा गुरु बताया उन्होंने कहा कि हनुमानजी की कृपा होने पर सभी ग्रह व्यक्ति के पक्ष में हो जाते हैं और सभी कष्टों का नाश हो जाता है। इस दौरान चंद्रपाल सिंह, महेश चंद, डॉ. एचएस चौहान, अमिता सिंह, नवनिहाल चौधरी, नरेश भाटी, सत्यवीर, अशोक सागर पांडेय, विजेंदर सिंह, ओमराज सिंह, डॉ. सत्यपाल, लाखन सिंह, सिंधु राणा, राजीव त्यागी, अनिल शर्मा, सुनील सैनी, संजीव चौहान, आशु अरुण, राजेश्वरी देवी, पल्लवी सिंह, प्रांशू, भुरेश, कुसुम, अनुप्रिया, बीना सिंह, अरुण प्रकाश, अशोक आदि मौजूद रहे।