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चुनावी साल में गन्ने में नहीं बढ़ा गन्ना मूल्य, किसानों में रोष

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किसानों की उम्मीदों पर सरकार ने फेरा पानी
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बिजनौर। प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्य में एक रुपये की भी वृद्धि नहीं की। किसान पिछले साल के गन्ना मूल्यों पर ही गन्ना डालेंगे। अर्ली प्रजाति के गन्ने का मूल्य 325 तथा सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 315 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा। पिछले साल भी प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्यों में केवल दस रुपये की ही वृद्धि की थी। पिछले साल की वृद्धि 3.17 प्रतिशत थी। चुनावी साल में भी गन्ने में एक रुपये की भी वृद्धि न होने से किसानों में रोष है। खुद चीनी मिलों के अधिकारी गन्ना मूल्यों में 15 से 20 रुपये की वृद्धि होने का अनुमान लगा रहे थे।
वेस्ट यूपी के किसानों की गन्ना ही प्रमुख फसल है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को शुगर बाउल कहा जाता है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 15 लाख किसान गन्ने की खेती करते हैं। बीते साल भी प्रदेश सरकार ने गन्ना मूल्यों में केवल दस रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी। अर्ली प्रजाति के गन्ने का मूल्य 325 रुपये प्रति क्विंटल व सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 315 रुपये प्रति क्विंटल घोषित किया था। चीनी के मूल्यों में कमी को गन्ना मूल्य में वृद्धि न होने का कारण माना जा रहा है, जबकि इस साल खेतों में गन्ने का उत्पादन दस से 15 प्रतिशत तक कम है। चीनी की रिकवरी भी हर साल बढ़ रही है। पिछले साल जब गन्ना मूल्य में केवल दस रुपये बढ़े थे तब माना गया था कि अगले साल लोकसभा चुनाव से पहले प्रदेश सरकार गन्ना मूल्यों में अच्छी खासी वृद्धि करेगी। चीनी के दाम कम होने के बाद भी किसान 20 रुपये प्रति क्विंटल तक वृद्धि होने का अनुमान लगा रहे थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
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सरकार के पहले साल में नहीं बढ़ा मूल्य
आमतौर पर सरकार किसी नई सरकार के पहले साल या चुनावी साल में गन्ने के दाम बढ़ाने की परंपरा रही है। सपा ने भी चुनावी साल में 2016 में 25 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की थी, लेकिन भाजपा सरकार में गन्ने के दाम में केवल दस रुपये प्रति क्विंटल की ही वृद्धि की गई।
बसपा सरकार में गन्ना मूल्य
साल सामान्य प्रजाति अर्ली प्रजाति
2007-08 110 115
2008-09 140 145
2009-10 165 170
2010-11 205 210
2011-12 240 250
सपा सरकार में भाव
2012-13 280 290
2013-14 280 290
2014-15 280 290
2015-16 280 290
2016-17 305 315
भाजपा सरकार में भाव
2017-18 315 325
2018-19 315 325
नोट:गन्ने के दाम रुपये प्रति क्विंटल में हैं।
चुनावी साल में भाव
2008-09 140 145 12.72 प्रतिशत वृद्धि
2011-12 240 250 11.70 प्रतिशत
2014-15 280 290 00 प्रतिशत
2016-17 305 315 10.89 प्रतिशत
2018-19 315 325 00 प्रतिशत
नोट:गन्ने के दाम रुपये प्रति क्विंटल में हैं।

लगातार चीनी और गुड़ के दामों में आ रहा उछाल
गन्ना मूल्य हर बार चुनाव में बड़ा मुद्दा बनता है। साल 2012 में सभी दलों ने गन्ना मूल्य 350 रुपये प्रति क्विंटल दिलाने का दावा कर रहे थे, लेकिन साल 2017-18 के पेराई सत्र में भी गन्ना मूल्य 325 रुपये तक ही पहुंच पाया है, जबकि चीनी और गुड़ के दामों में लगातार उछाल आ रहा है।

साल-दर-साल चीनी और गुड़ के दाम
साल चीनी गुड़
अक्तूबर 2012 2900 2280
अक्तूबर 2013 2920 277ऱ्0
अक्तूबर 2014 2900 2393
अक्तूबर 2015 2610 2465
अक्तूबर 2016 3639 3210
अक्तूबर 2017 3885 4000
अक्तूबर 2018 3150 3600
नोट:चीनी के आंकड़े शुगर मिलों व गुड़ के आंकड़े मंडी से लिए गए हैं। आंकड़े प्रति क्विंटल में हैं।

गन्ने से बनता है बहुत माल
भाकियू के मंडल अध्यक्ष अतुल कुमार के अनुसार एक क्विंटल गन्ने से करीब 13 किलो चीनी तक बनती है। इसके अलावा करीब 30 किलो खोई व साढ़े चार किलो शीरा बनता है। शुगर मिलें शीरे से एथनॉल भी बनाती हैं। कुल मिलाकर एक क्विंटल गन्ने से 700 रुपये से भी ज्यादा का माल तैयार हो रहा है।

वादों से मुकरी भाजपा
भाकियू जिलाध्यक्ष दिगंबर सिंह के अनुसार गन्ना शोध केंद्र शाहजहांपुर ने गन्ने की लागत 290 रुपये प्रति क्विंटल बताई है। भाजपा ने फसल लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने की बात कही थी। शोध केंद्र भी सरकार का है और घोषणा भी। अब किसान सरकार को सबक सिखाएंगे।
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किसानों के साथ किया है कुठाराघात
भाकियू भानु जिलाध्यक्ष वीर सिंह के अनुसार सरकार ने किसानों पर कुठाराघात किया है। सरकार चीनी मिल मालिकों के लिए काम कर रही है। जब हर चीज पर महंगाई बढ़ रही है तो गन्ने के दाम क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे। सरकार को इसका खामियाजा चुनाव में भुगतना पड़ेगा।
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