सैदनगली। कस्बे में चार मोहर्रम को सारे दिन कर्बला की याद में मजलिस कर अजादार रोते रहे। इमाम बारगाह फ़ातेमा दख्खन, अलमदार हुसैन, सख़ी हुसैन, अजाखाना मीर मुजाहिद हुसैन में पूरे दिन मजलिसे हुईं, जिसमें सलमान अब्बास और साथियों ने मर्सिए पढ़े। जबकि मजलिस को सफी मुक़्तदा ने खिताब किया।
नबी के नवासे हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की याद में सादात के घरों मे महिलाएं भी मजलिस कर रही है। कर्बला के शहीदों का मातम कर रही है। रात को इमामबारगाह दादे जी और पीर जी में मजलिसें हुईं, जिसमें मर्सिये नसीमुल हसन और साथियों ने पढ़े। दिल्ली से तशरीफ़ लाए मौलाना मोहसिन तकवी ने कहा कि रसूल के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने अपने 72 साथियों के साथ कर्बला के मैदान मे अजीम क़ुर्बानी देकर सिर्फ़ इस्लाम को ही नहीं बचाया बल्कि इंसानियत को बचाया है। कर्बला का नाम सुनकर अजादार चीख़ मारकर रोए और मातम किया। अम्मार हैदर रिजवी, रियाजुल हसन, जीशान हैदर, हसन मेहदी बाकरी, हाशिम रजा, तनवीर अब्बास, हसन रजा, वक़ार मेहदी, सुहैल अब्बास, सादिक़ रजा, हाजी ताहिर हुसैन, शादाब रजा, अजमी अब्बास, क़ायम मेहदी, मुजम्मिल हुसैन मौजूद रहे।