अमरोहा। इन दिनों मृदा स्वास्थ्य कार्ड के वितरण का काम तेजी से चल रहा है। 29 हजार किसानों को कार्ड दिए जा चुके हैं, वहीं इस महीने करीब एक लाख और किसानों को कार्ड दे दिए जाएंगे। इससे उर्वरक के संतुलित प्रयोग को बढ़ावा मिलेगा और रसायनिक खाद की खपत घट जाएगी।
साल 2015 में भारत सरकार ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की शुरुआत की थी। तभी से यह योजना निरंतर चल रही है। अमरोहा में भी यह योजना दूसरे चक्र में हैं। जिसमें एक लाख 29 हजार किसानों के खेतों की मिट्टी के नमूने लेकर जांच की गई। मिट्टी में सूक्ष्म तत्वों सहित नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश सहित जीवाश्म कार्बन की स्थिति को परखा गया। जांच के बाद मिट्टी की मौजूदा स्थिति से किसानों को कार्ड देकर रूबरू कराया जा रहा है। गौरतलब है कि किसानों को अपने खेत की मिट्टी में मौजूद तत्वों की जानकारी नहीं होती। ऐसे में अंधाधुंध रसायनिक खादों का प्रयोग किया जा रहा है।
रसायनिक खादों के अंधाधुंध प्रयोग ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति को कम करने का काम किया। अब इस मिट्टी की जांच कर किसानों को करीब 28 हजार कार्ड बांट दिए गए हैं। इसी महीने एक लाख और किसानों को कार्ड दिए जाएंगे। कार्ड पर किसानों को यह जानकारी देने का काम किया जा रहा है कि उन्हें अपनी जमीन में कौन सा खाद डालना है। इससे खाद की खपत कम होगी। वहीं फसल उत्पादन में आने वाली लागत में कमी आ जाएगी। जिससे किसानों का मुनाफा बढ़ना तय माना जा रहा है।
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कम हुआ है जीवाश्म कार्बन
अमरोहा। जिले भर के खेतों से मिट्टी की जांच की गई तो चौंकाने वाला सच सामने आया है। इसमें जीवाश्म कार्बन की कमी पाई गई है। यह जैविक खाद होता है और फसलों को नाइट्रोजन देने का काम कर रहा है। रसायनिक खादों के प्रयोग ने जीवाश्म कार्बन को कम करने का काम किया है। यह फसलों के साथ साथ मिट्टी को भी खराब कर रहा है। जीवाश्म कार्बन को किसानों को जैविक खाद प्रयोग करने की सलाह दी जा रही है।
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-- दूसरे चक्र में 28 हजार किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जा चुके हैं, इसी माह करी एक लाख और किसानों को कार्ड दे दिए जाएंगे। जिससे संतुलित उर्वरक प्रयोग करने में मदद मिलेगी। वहीं रसायनिक खादों की खपत में कमी आएगी।
-राजीव कुमार, जिला कृषि अधिकारी