बाढ़ में क्षतिग्रस्त दीवार को दुरुस्त कराने का काम जोरों पर
कालागढ़ (बिजनौर)। वर्ष 2010 में आई बाढ़ में क्षतिग्रस्त हुई सैडिल बांध की 99 मीटर की दीवार की मरम्मत का कार्य जोरों पर चल रहा है। बांध के अधिकारी लगातार बढ़ते बांध के जलस्तर को लेकर चिंतित है। सैडिल बांध के ईई शेर सिंह का कहना है कि बरसात से पूर्व मरम्मत कार्य को पूरा कर लिया जाएगा।
2010 की बाढ़ का जिक्र आते ही उत्तर प्रदेश के सात जनपदों की त्रासदी याद आ जाती है। बिजनौर के इलाके में पचास से अधिक गांव बाढ़ से ग्रस्त हुए थे। पानी के तेज प्रवाह ने सैडिल बांध की दीवार को 99 मीटर तक खोखला कर दिया था। बांध के ईई का कहना है कि बाढ़ से पूर्व बांध सुरक्षा को लेकर किए जाने वाले कार्यों के तहत क्षतिग्रस्त दीवार का मामला सामने आया। पर विभाग के सामने फंड की समस्या थी। वर्तमान में बांध के क्लोजर के लिए उत्तराखंड जलविद्युत उत्पादन निगम से फंड मिल जाने से सैडिल बांध की मरम्मत भी संभव हो सकी। बरसात से पहले बांध की दीवार को दुरुस्त कर लिया जाएगा। वहीं अन्य दीवारो और पिचिंग का काम भी जारी है।