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मेडिकल स्टोर संचालक करेंगे टीबी रोगियों को जागरुक

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मेडिकल स्टोर संचालक करेंगे टीबी रोगियों को जागरुक
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बिजनौर। निजी चिकित्सकों की तरह मेडिकल स्टोर संचालक को भी दवा का पर्चा आते ही इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी होगी। संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम (एनटीपीसी) के तहत टीबी उन्मूलन की तैयारी में सरकार जुटी है। अब प्राइवेट चिकित्सकों के अलावा उन जन मेडिकल स्टोरों को भी मरीजों की सूचना जिला क्षय रोग अधिकारी को देनी होगी, जहां से मरीज दवाई खरीद रहे हैं।
जिले में लगभग तीन हजार मेडिकल स्टोर संचालित हैं। इनमें से दो हजार रिटेल और एक हजार होलसेल के शामिल हैं। अब मेडिकल स्टोर संचालकों को अलग से रजिस्टर बनाकर संबंधित मेडिकल स्टोर से दवा खरीदने वाले टीबी रोगियों का डाटा रखना होगा और निर्धारित प्रपत्र पर सीएमओ कार्यालय में जमा करना होगा। केंद्र सरकार की मंशा है कि टीबी को भारत से समूल नष्ट कर दिया जाए। इसके लिए सरकार ने वर्ष 2035 का लक्ष्य रखा था, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे घटाकर 2025 कर दिया है। अफसरों की मानें तो करीब एक लाख की जनसंख्या पर लगभग 250 मरीज संभावित होते हैं। इनमें से करीब 200 किसी सरकारी अस्पताल से, जबकि शेष निजी चिकित्सकों से दवाई लेते हैं। इससे मरीज वास्तव में दवा खा रहे हैं या नहीं इसकी हकीकत का पता नहीं चल पाता। आंकड़े जुटाने में यह योजना कारगर नहीं हो पाती। इस संदर्भ में सरकार के नोटिफिकेशन के बारे में जिले के सभी दवा विक्रेताओं को अवगत करा दिया गया है। जिला क्षय रोग अधिकारी बीएस रावत ने बताया कि मेडिकल स्टोर संचालकों को टीबी रोगियों के संबंध में मेडिकल स्टोर संचालकों को निर्धारित प्रपत्र पर सूचना देनी होगी। इससे रोगियों की वास्तविक संख्या का पता चलने से उपचार करने में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में जिले में करीब छह हजार मरीजों का उपचार चल रहा है। टीबी रोगियों की सूचना नहीं देने वाले मेडिकल स्टोर संचालकों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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यह देनी होगी जानकारी
मेडिकल स्टोर संचालकों को चिकित्सा विभाग की ओर से निर्धारित प्रपत्र में प्रत्येक टीबी रोगी का नाम, पिता का नाम, रोगी की उम्र, पूरा पता, मोबाइल नंबर, निजी स्तर पर उपचारित चिकित्सक का नाम व पता, रोगी को दी जाने वाली दवा का नाम, दवा के बैच नंबर, दवा की संख्या व बिल नंबर की जानकारी देनी होगी।
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