इब्राहिमपुर में गंगा के कटान से खेतों को मिलेगी निजात
बिजनौर। बाढ़ से होने वाले कटान को रोकने के लिए बनाया गया प्रस्ताव मुख्यमंत्री कार्यालय में पहुंच गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जिले से भेजे गए पांच में से एक प्रस्ताव को हरी झंडी मिल भी गई है। धामपुर के गांव इब्राहिमपुर के पास नौ करोड़ की लागत से कटान रोकने के लिए काम जल्दी ही शुरू हो जाएगा। बाकी चार प्रस्ताव अगली बैठक में रखे जाएंगे। इन प्रस्तावों पर मुहर लगने के बाद तटीय गांवों में गंगा से होने वाले खेतों के कटान को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इससे हजारों किसानों को फायदा होगा।
उत्तराखंड व यूपी के दोनों के गांव गंगा के दोनों ओर बसे हैं। पहाड़ों पर बारिश से मैदानों में आने वाला पानी दोनों राज्यों के खेतों की मिट्टी काटकर अपने साथ ले जाता था। कटान को रोकने के लिए उत्तराखंड सरकार ने तीन साल पहले अपने क्षेत्र में गंगा किनारे तटबंध बनवा दिए थे। इसके बाद से पानी का सारा जोर यूपी की सीमा में गंगा किनारे बसे गांवों की ओर ही रहता है। बरसात में उफनने वाली गंगा की लहरें इन गांवों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती है। हर साल गंगा की लहरें सैकड़ों बीघा खेतों की मिट्टी काटकर अपने साथ बहा ले जाती है। किसानों को हर साल जमीन से हाथ धोना पड़ता है। कटान करती गंगा कई गांवों के पास तक आ गई है। सिंचाई विभाग खंड अफजलगढ़ के अधिकारियों ने तटीय गांवों को कटान से बचाने को तटबंध बनाने के लिए 61 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर शासन को भेजा था। प्रोजेक्ट को मंजूर होने से पहले उत्तर प्रदेश बाढ़ राज्य नियंत्रण परिषद की तीन समितियों की मंजूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजा गया था। जिले से कुल पांच प्रस्ताव भेजे गए थे। पिछले महीने लखनऊ में हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इनमें से एक प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है। धामपुर के गांव इब्राहिमपुर के सामने कटाने रोकने के लिए किए जाने वाले कार्यों को मंजूरी मिल गई है। बाकी प्रस्ताव अगली बैठक में रखने को कहा गया है। बाकी प्रस्तावों को भी जल्दी ही मंजूरी मिलने की संभावना है। सिंचाई विभाग के एक्सईएन रामबाबू के अनुसार एक प्रस्ताव को मुख्यमंत्री द्वारा मंजूरी दे दी गई है।
इन गांवों में कटान करती है गंगा
गंगा गौंसपुर, मिर्जापुर, राजारामपुर, डैबलगढ़, ब्रह्मपुरी, सुक्खापुर, कुंदनपुर, टीप, सिमलीकला, मीरापुर, कोहरपुर, चाहड़वाला आदि दर्जन भर गांवों में कटान करती है। गंगा किनारे खेतों में तैयार फसल मिट्टी के साथ गंगा की धारा में बह जाती है।
गंगा द्वारा कटान का मामला हर चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रहता है। यहां पर सालों से तटबंध बनवाने की मांग चलती आ रही है, लेकिन इस पर केवल वादे ही किए जा रहे थे। पहली बार कटान रोकने की फाइल मुख्यमंत्री दरबार तक पहुंची है।