शिक्षा विभाग ने खुलवाया विद्यालय, राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में खिंची गई लाइन
बिजनौर। वन विभाग की जमीन पर बसे गांव रामपुर ठकरा पर गांववालों का ही नहीं बल्कि सरकारी विभागों का भी अवैध कब्जा काबिज रहा। वन विभाग की जमीन पता होने के बावजूद गांव में सरकारी धन की खूब बरसात हुई। किसी ने यह नहीं देखा कि गांव के स्वामित्व को लेकर केस चल रहा है। गांव में सरकारी धन लुटाया गया। अब गांववाले कह रहे हैं कि अगर वे अवैध रूप से रह रहे तो फिर गांव में नियम विरुद्ध निर्माण कार्य क्यों कराए गए।
गांव रामपुर ठकरा की जमीन साल 1968 में शासन द्वारा वन विभाग को दे दी गई थी। वन विभाग की जमीन में निर्माण कार्य नहीं हो सकता है और न ही बिजली की लाइन खिंची जा सकती है, लेकिन गांव रामपुर ठकरा में नियमों को ताक पर रखकर ये सब कार्य किए गए। गांव में दो दशक से भी पहले शिक्षा विभाग द्वारा प्राइमरी स्कूल खोला जा चुका है। पूरे गांव के बच्चे यहां पढ़ते हैं। इसके अलावा गांव में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत आठ साल पहले बिजली के खंभे गाड़कर बिजली की लाइन भी खिंची गई। गांव में ग्राम पंचायत द्वारा सड़कें भी बनी हैं। गांव की मुख्य सड़क की हालत इतनी अच्छी है कि शहर में भी ऐसी सड़क नहीं है। वन विभाग के अफसरों की नाक के नीचे अलग-अलग विभागों ने गांव में नियमों की धज्जियां उड़ाईं व निर्माण कराया। गांव वालों द्वारा इसे ढाल के रूप में इस्तेमाल करने पर विद्युत निगम ने करीब एक साल पहले गांव की बिजली काट दी थी, लेकिन खंभे, लाइन और ट्रांसफार्मर आज भी गांव में लगे हैं। गांववालों का कहना है कि गांव में कोई सरकारी काम होता देखकर उन्हें लगता था कि जमीन की स्वामित्व का केस वे ही जीतेंगे। उनके गांव को उजाड़ा नहीं जा सकता है। अब यहां सरकारी कार्य में धन लगवाने वाले अधिकारियों के वेतन से सरकारी निर्माण में लगे धन की रिकवरी होनी चाहिए।
डीएफओ डा.एम सेम्मारन का कहना कि गांव में सरकारी निर्माण कराने वाले विभागों को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है। अब गांव में पौधरोपण कराया जाएगा।