बिजनौर । राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने छठे वेतन आयोग की विसंगतियां दूर करते हुए सातवें वेतन का लाभ दिलाने निजीकरण, आउटसोर्सिंग और ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करने समेत 13 मांगों को लेकर प्रांतीय आह्वान पर धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने डीएम के माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भी भेजा।
बुधवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने जिला संयुक्त चिकित्सालय में धरना किया। धरने में वक्ताओं ने कहा कि सरकार को राज्य कर्मचारियों को केंद्र सरकार की तरह सभी भत्ते समान देने चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि उन्हें डिप्लोमा इंजीनियर की भांति सातवां वेतनमान, सीधी भर्ती की अधिकतम आयु 40 वर्ष को दृष्टिगत एसीपी में आठ, 16 व 24 वर्ष की सेवा पर तीन पदोन्नति मिलनेे, उपार्जित अवकाश के संचय की तीन सौ दिन सीलिंग समाप्त कर सेवानिवृत्ति पर तीन सौ दिन के अवकाश नगदीकरण को बढ़ाकर छह सौ दिन करने, रिक्त पदों के सापेक्ष नियमित नियुक्तियां करने, संविदा, आउटसोर्सिंग और अन्य माध्यमों से कार्यरत कर्मियों को समान कार्य का समान वेतन निर्धारित करने, 50 वर्ष पूर्ण कर चुके कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्ति बंद कराने, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारियों और सेवा निवृत्त कर्मचारियों को कर्मचारी कल्याण निगम के माध्यम से बिक्रीत वस्तुओं को जीएसटी से छूट प्रदान करने और प्रदेश में विनियमित किए गए कार्मिकों की पुरानी अहकारी सेवा को जोड़ते हुए पेंशन का लाभ प्रदान करने की मांग की है। धरने में गजेंद्र शर्मा, ह्देश सारस्वत, टीकम सिंह सैंगर, सलीम अहमद, दिलीप सिंह, राकेश चौहान, जेपी सिंह, राजेश रवि, प्रदीप रावत, वीके गुप्ता, मिथलेश वर्मा, संजीव कुमार, सतेंद्र कुमार अमौली, अशोक भंडारी और एनसी रूडोला मौजूद रहे।