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निजी कोविड अस्पताल के सामने युवक की मौत-संशोधित

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ज्ञानपुर। दो दिन पूर्व शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने सात निजी अस्पतालों को कोविड-19 का दर्जा देकर महामारी से पीड़ित मरीजों की जान बचाने का सख्त निर्देश दिया है। इसके बावजूद निजी अस्पताल संचालक बेड और ऑक्सीजन की कमी बताकर कोरोना संक्रमित मरीजों को भर्ती नहीं कर रहे हैं।
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इसी क्रम में बृहस्पतिवार को सुबह मिश्रपुर-मिर्जापुर निवासी तौहीद आलम (34) ने उस समय दम तोड़ दिया, जब परिजनों के गिड़गिड़ाते रहने के बाद भी अस्पताल में उनको भर्ती नहीं किया जा सका। इसके बाद रोते-बिलखते परिजनों ने बताया कि तौहीद की तबियत भोर में ज्यादा खराब हो गई। किसी तरह सुबह होने पर रिजर्व वाहन से उन्हें भदोही नगर लेकर पहुंचा गया। बृहस्पतिवार को सुबह लगभग नौ बजे निजी अस्पताल पहुंचने पर कर्मचारियों ने कहा कि उनके यहां न तो बेड खाली है न ही ऑक्सीजन है। लिहाजा तौहीद को कहीं अन्यत्र ले जाएं। वहीं सड़क पर टहल रहे लोगों से जानकारी लेकर दूसरे निजी अस्पताल पहुंचे। जहां जांच के लिए खून ले लिया गया और रिपोर्ट तीन घंटे बाद देने की बात कही गई। इस दौरान विलंब होने पर कर्मचारियों के पैर पकड़कर तौहीद के परिजनों ने इलाज के लिए गुहार लगाई, लेकिन कुछ नहीं किया गया। इस बीच तौहीद ने निजी अस्पताल के बाहर ही दम तोड़ दिया। मौत होने पर परिजन शव लेकर मिश्रपुर लौट गए। मरीज के साथ आए मोहम्मद आलम, जावेद अली, टीपू, जावेद ने आरोप लगाया कि एक ओर सरकार इस तरह की लापरवाही होने पर डीएम और सीएमओ को जिम्मेदार ठहराने की बात कह रही है, दूसरी तरफ से सरकारी से लेकर निजी कोविड अस्पतालों तक में तैनात कर्मचारी, नोडल अधिकारी मरीजों का दर्द नहीं समझ रहे हैं। निजी कोविड अस्पताल भदोही के नोडल अधिकारी/उप जिलाधिकारी सदर चंद्रशेखर ने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी।
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