ज्ञानपुर। नाग पंचमी के अवसर पर प्रत्येक वर्ष जगह-जगह आयोजित होने वाले कुश्ती-दंगल और फर्री कलैया आदि के उत्साह से भरे कार्यक्रम इस बार कोरोना संक्रमण की भेंट चढ़ गए। कोविड-19 के मानकों की संवेदनशीलता के मद्देनजर इन कार्यक्रमों का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसके चलते अखाड़े भी सूने रहेंगे। कई जगहों पर आयोजकों ने कार्यक्रम स्थगित कर दिए। पिछले कई महीनों से चल रहे संक्रमण काल के कारण आयोजकों ने इसकी पूर्व की तैयारी पर भी ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
सर्पभय से मुक्ति की खातिर मनाया जाने वाला नागपंचमी का त्योहार कालीन नगरी में शनिवार को मनाया जाएगा। इसके निमित्त तैयारियों को शुक्रवार देर शाम तक अंतिम रूप दे दिया गया। सुबह नाग देवता को दूध-लावा अर्पित कर लोक कल्याण की कामना की जाएगी। नागपंचमी के त्योहार का पूर्वांचल में खास महत्व है। काशी से प्रकाशित ऋषिकेश पंचांग के अनुसार इस बार नागपंचमी 25 जुलाई को मनाई जाएगी। डुहियां के पं. दीनानाथ शुक्ल के मुताबिक इस दिन गृह द्वार के दोनों ओर नाग का चित्र लगाकर या गाय के गोबर से नाग की आकृति बनाकर घी, दूध एवं जल से तर्पण किया जाता है। साथ ही दूध, धूप, दूब, माला से पूजन करने के बाद दूध-लावा का भोग लगाना चाहिए। इससे नाग देवता प्रसन्न होते हैं और पूजा करने वाले के परिवार में किसी तरह का सर्प भय नहीं रहता। उन्होंने बताया कि नाग पंचमी को गांवों में पंचैया कहते हैं। इस दिन गांव के लोग आंगन में झूला डालकर झूलने की परंपरा भी निभाते हैं।