गेहूं खरीद का सीजन 14 जून को समाप्त हो गया, लेकिन सरकारी क्रय केंद्रों पर खरीद की हालत दयनीय रही। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के क्रय केंद्रों पर इस बार निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले पांच फीसदी गेहूं की खरीद भी नहीं हुई। शासन से जिले को 13 हजार मीट्रिक टन (1.30 लाख कुंतल) गेहूं खरीदारी का लक्ष्य मिला था। जबकि क्रय केंद्रों पर महज छह हजार 60 कुंतल गेहूं की खरीद ही हो सकी। इसके पीछे कम पैदावार और सरकारी क्रय केंद्रों के मुकाबले व्यापारियों और आढ़तियों के ज्यादा कीमत देकर गेहूं खरीद दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।
जिले में सरकारी एजेंसियों पर गेहूं खरीद का लक्ष्य औंधे मुंह गिर गया है। फरवरी में आई बारिश और तूफान के चलते फसलों को भारी नुकसान पहुंचा था। फसलों के अंतिम चरण में पहुंचने के बाद आई प्राकृतिक आपदा ने किसानों की उम्मीद पर पानी फेर दिया था। इससे क्रय केंद्रों पर जो किसान उपज की बिक्री कर अपनी आय को बढ़ाते थे, उनके यहां इस बार घर के खर्च के लिए भी अनाज की कमी पड़ गई। इसके चलते वे अनाज क्रय केंद्र पर बेचने के बजाय खाने के लिए खरीदने में जुटे रहे। इससे क्रय केंद्रों पर किसानों की भीड़ न के बराबर देखने को मिली। लिहाजा ढाई माह तक चले खरीद सीजन में गेहूं खरीद का लक्ष्य धड़ाम हो गया। 14 जून को खरीदारी के सीजन का अंतिम दिन था। आंकड़े के मुताबिक खरीदारी के अंतिम दिन तक जिले में विपणन के पांच क्रय केंद्रों पर नौ हजार एमटी लक्ष्य के मुकाबले 506 एमटी ही खरीद हो सकी थी। जो कि लक्ष्य का 5.63 फीसदी रहा। पीसीएफ के नौ क्रय केंद्रों को चार हजार एमटी यानी 40 हजार कुंतल का लक्ष्य मिला था। जबकि पीसीएफ 99.25 एमटी ही गेहूं खरीद सका। यह कुल लक्ष्य का 2.88 फीसदी रहा। इस तरह जिले में कुल लक्ष्य का केवल 4.66 फीसदी गेहूं की खरीद हो सकी। जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी संजय सिंह ने बताया कि जिन किसानों ने खरीद के लिए क्रय केंद्रों का रुख किया, उनकी उपज खरीदी गई। उपज प्रभावित होने के कारण गेहूं बेचने के लिए कम किसान केंद्रों पर पहुंचे।