ज्ञानपुर। शौक जब जुनून बन जाए तो कुछ अलग और विशेष देखने को मिलता है। ऐसा ही कुछ अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले में हस्तनिर्मित वॉल आर्ट कालीन के रूप में देखने को मिला है। सामान्य हस्तनिर्मित कालीनों से बिल्कुल अलग नजर आने वाले यह कालीन देखने में प्रिटेंड लगते हैं, लेकिन यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित हैं। अपने शौक को कालीनों में बुनने का काम किया है भदोही के कालीन निर्यातक आरफा अंसारी ने। यह कालीन काफी महंगा और विशेष होता है। इस देखकर हर कोई इसका मुरीद हो गया।
45वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले में लगा वाल आर्ट कालीन बरबस ही सबको अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है। वाॅल ऑर्ट कालीनों की सबसे बड़ी खासियत उसकी डिजाइन होती है। कालीन निर्यातक आरफा अंसारी ने बताया कि यूके से फोटोग्राफी का कोर्स करने के बाद जब वे भारत लौटै तो उन्होंने फोटोग्राफी को ही अपना पैशन बना लिया। खूबसूरत जगहों पर जाना और उसकी फोटो क्लिक करना उनका शौक था। बताया कि अचानक उनके दिमाग आया कि अपने इस शौक को वे कालीनों पर भी उकेर सकते हैं। इसके बाद वे इस काम में जुट गए। वॉल आर्ट कालीन में उन्होंने जो सबसे पहला कालीन तैयार किया वह था बनारस के घाट। पूरी तरह से कलरफुल इस कालीन को देखकर हर कोई आश्चर्यचकित रह गया। इसके लिए उन्हें बेस्ट डिजाइन का अवार्ड भी मिला। देखते ही देखते पूरे विश्व में इन कालीनों की मांग काफी बढ़ गई। इसके बाद से ये लगातार वॉल आर्ट कालीनों में इनोवेशन करने लगे। उनके शोरूम में आगरा के ताजमहल और लद्दाख के पहाड़ियों की ब्लैक एंड व्हाइट वॉल आर्ट वाले कालीन लगे थे। उन्होंने बताया कि बताया कि ताजमहल वाले कालीन को दो कारीगरों ने सात महीनों में तैयार किया था। पांच बाई सात के इस कालीन की कीमत दो लाख रुपये है।