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वेद का तात्पर्य ज्ञानग्रंथ से है : स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

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ज्ञानपुर। सेमराधनाथ धाम के पास स्थित पुरवा, इब्राहिमपुर के अंजोराधाम में रविवार को ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद ने जिले के पहले जगद्गुरूकुलम् का शुभारंभ किया। शाम को करीब सात बजे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के अंजारोधाम पहुंचने पर बटुकों ने सस्वर वेद मंत्रों का उच्चारण किया। इसके बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वारनंद ने अंजोरा धाम में विधिवत पूजा अर्चना की। सूर्यास्त होने के चलते स्वामी जी मौन मुद्रा में अपने सिंघासन पर बैठे रहे। इस दौरान वे कुछ बोले नहीं। पत्र के जरिये संदेश दिया। िशष्य ने उनके पत्र का वाचन किया। पत्र में उन्होंने लिखा कि आदिशंकराचार्य ने अपने साधन पंचक नामक स्त्रोत में प्रतिदिन अध्ययन करने की प्रेरणा दी है। वेद का तात्पर्य ज्ञानग्रंथ से है। हमें प्रतिदिन अपने ज्ञान की वृद्धि करते रहना चाहिए। जगदगुरूकुलम उसी की नींव है। जिसे परमेश्वर नाथ मिश्र ने सतप्रयास से स्थापित किया है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का दर्शन करते हुए उनके हाथों से प्रसाद भी प्राप्त किया।
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इसके बाद स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती महाराज ने पूजन किया। कहा अंजोरा मां की भक्ति से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। हर व्यक्ति को गो माता की रक्षा करनी चाहिए। कहा कि जनपद में पहले गुरुकुल आश्रम का उद्घाटन बड़े ही सौभाग्य की बात है।

इस क्षेत्र के बच्चे संस्कृत, संस्कार, ऋषियों के शुद्ध ज्ञान विज्ञान को ग्रहण करेंगे। उन्होंने बच्चों को धर्म व संस्कृति की शिक्षा देने पर जोर दिया। कहा कि जब बच्चे धर्म व संस्कृत से जुड़े रहेंगे तो उनके अंदर संस्कार की भावना जागृत होगी। आधुनिक संग संस्कृत और संस्कार की शिक्षा जरूरी है। संस्थापक डॉ. परमेश्वरनाथ मिश्रा ने बताया कि आश्रम में ज्योतिर्मठ बदरिकाश्रम के चयनित 24 बटुक वैदिक शिक्षा ग्रहण करने के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा को भी प्राप्त कर सकेंगे।
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जिले के पहले जगद्गुरुकुलम् में बटुकों को शिक्षित करने वाले आचार्यो के साथ-साथ बटुकों का चयन भी ज्योर्तिमठ बदरिकाश्रम की ओर से किया गया है।

24 बटुकों में अधिकतर जिले के हैं। इसके अलावा छत्तीसगढ़, बलिया और मध्यप्रदेश के भी कुछ बटुक यहां वैदिक शिक्षा ग्रहण करेंगे।

आवासीय जगद्गुरूकुलम् में बटुकों की शिक्षा-दीक्षा से लेकर रहने-खाने का भी कोई शुल्क नहीं है। उनकी पत्नी रेखा मिश्र ने बताया कि जगद्गुरूकुलम् की स्थापना के पीछे स्व. राजाराम दुबे की प्रेरणा हैं।

अपनी सनातन संस्कृति और परंपरा को पुर्नजीवित करने और आने वाली पीढि़यों को नैतिकता का पाठ पढ़ाने के साथ उन्हें वैदिकता और आधुनिकता के बीच सामंजस्य स्थापित कर उनका सर्वांगीण विकास ही जगद्गुरूकुलम् का मुख्य उद्देश्य है। बताया कि बच्चों को यहां वेदों के पाठ के साथ-साथ उच्चारण और उसमें निहित नैतिकता से परिचित कराया जाएगा। इसके अलावा उन्हें आधुनिक विषय कंप्यूटर, अंग्रेजी, गणित, सामाजिक विज्ञान व आधुनिक विज्ञान जैसे विषयों को भी पढ़ाया जाएगा। बच्चों को शंकराचार्य के हाथों उपाधि के साथ-साथ राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षण संस्थान (एनआईओएस) की डिग्री भी मिलेगी।

जिससे यहां के बाद वे उच्च शिक्षा के लिए संस्कृत विवि में प्रवेश ले सकें। स्वागताध्यक्ष निखिलेश मिश्रा ने बताया कि हमारी वैदिक परंपराए काफी समृद्ध रहीं हैं।

आज के परिवेश में नैतिकता का पाठ जरूरी हैं। जगद्गुरूकुलम् हमारी पीढि़यों को हमारी समृद्ध सनातन संस्कृति की ओर प्रेरित करेगी। स्वागत स्वामी करूणा शंकर दास, समाजसेवी निखिलेश मिश्रा, ज्ञानपुर विधायक विपुल दुबे, डॉ. ओंकारनाथ मिश्रा, डॉ. एसके पांडेय ने किया। इस मौके पर डीघ ब्लॉक प्रभारी मनोज कुमार मिश्रा, प.राजधर मिश्रा, अजय मिश्रा, रुद्रपति दुबे, विनय दुबे, रविशंकर पांडेय, नागेंद्र शुक्ला, जयशंकर दुबे, राहुल सिंह, रंगनाथ दुबे, कल्लन सिंह आदि रहे। वहीं देर शाम वाराणसी से जाते समय स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का चकपड़ौना चौराहे पर श्रीनिवास चतुर्वेदी, सुरेश सिंह, रवीश पांडेय आदि ने स्वागत किया।
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