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‘भिंडी का उपयोग मनुष्य की सेहत को बनाता है स्वस्थ’

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ज्ञानपुर। भिंडी खरीफ मौसम की प्रमुख सब्जी फसल है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन के अतिरिक्त विटामिन और खनिज लवण भी पाए जाते हैं। आहार में भिंडी का उपयोग मनुष्य की सेहत को स्वस्थ बनाता है इसकी तरह-तरह के प्रजातियों की बुआई कर अच्छी आमदनी के साथ किसान अपनी आर्थिक स्थिति भी सुधार सकते हैं। वैश्विक महामारी के दौर में इसकी खेती कर किसान रोजगार तो हासिल करता ही है नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक ताजी सब्जी की उपलब्धता भी सस्ते दरों में हो जाती है।
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काशी क्रांति, काशी विभूति, काशी प्रगति, काशी लीला, काशी सतधारी, शीतला उपहार, शीतला ज्योति, काशी महिमा, काशी मोहिनी, काशी मंगली, काशी लीला, काशी लालिमा, काशी भैरव, परभणी क्रांति, वर्षा उपहार, पूसा मखमली प्रमुख प्रजाति हैं। केवीके बेजवां के फसल सुरक्षा विशेषज्ञ डा.मनोज कुमार पांडेय ने बताया कि भिंडी की फसल कई कीट एवं बीमारियों से प्रभावित होती है। इस पर समय से नियंत्रण होने पर आय का स्रोत बन जाती है।
मुख्य रूप से लगने वाले कीट सफेद मक्खी, सफेद तना एवं फल छेदक कीट, जैसिड, लाल माइट और पत्तियों को खाने, चाटने वाले कीट होते हैं। नियंत्रण के लिए पीला चिपचिपा ट्रैप प्रति एकड़ 15 से 20 ग्राम प्रयोग करना चाहिए। तना छेदक कीट अबामेक्टिन, माइटीसाइड का प्रयोग करते हैं। प्रमुख बीमारियों में गुरचा रोग और पीत शीरा मोजैक रोग विषाणु जनित हैं इन रोगों से सफेद मक्खी स्वस्थ पौधों तक पहुंचाई जाती है और पत्तियां पूरी तरह से सिकुड़ कर ऐंठ जाती हैं, पित शिरा मोजैक रोग से फसल की शिराएं पीली होकर नुकसान पहुंचाती हैं।
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नियंत्रण के लिए पीला चिपचिपा ट्रैप को प्रति एकड़ 15 से 20 जगह पर लगाते हैं और इससे नियंत्रण नहीं होता है तो थायोमेथाक्साम नामक कीटनाशक की पांच ग्राम मात्रा में प्रति हेक्टेयर 15 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करते हैं। डीघ मझगवां के किसान मुन्नीलाल ने कहा कि इस मौसम व भिंडी बोआई कर लॉकडाउन का खर्च निकालते हुए ताजी सब्जी की उपलब्धता बरकरार रखी है।
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